google.com, pub-8785851238242117, DIRECT, f08c47fec0942fa0 मारीच वध की कथा। Story of marich death. - पौराणिक दुर्लभ कथाएं

भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

22 January, 2020

मारीच वध की कथा। Story of marich death.

कौन था मारीच Who was Marich?

मारीच ताड़का का पुत्र था तथा उसक पिता का नाम सुन्द था। वह रामायण कथा के अनुसान राछस योनि का था जो ताडूक वन में श्रीराम से युद्ध के पश्चात आसुरी प्रवित्ति को त्याग कर भगवान शिव की आराधना में लग गया था।


मारीच और ताड़का का श्रीराम से युद्ध Shri Ram bettal with Tadka and Marich:

श्रीराम ने एक स्त्री का वध किया था। स्त्री वध रघुकुल की रीत और क्षत्रीय धर्म के विरुद्ध था लेकिन फिर भी श्रीराम को लोक कल्याण के लिए यह कदम उठाना पड़ा, क्योंकि पिता दसरथ का आदेश था कि महर्षि विश्वामित्र जो आज्ञा दे उसे करना होगा।

भगवान श्रीराम अपने छोटे भाई लक्ष्मण और गुरु विश्वामित्र के साथ जा रहे थे। रास्ते में निर्जन स्थान पर बड़े और भयानक पद चिह्न देखकर उन्होंने अपने गुरु से पूछा कि गुरुदेव यह स्थान तो बड़ा ही भयावह प्रतीत होता है और इस निर्जन वन में ये विशाल पदचिह्न किसके हैं, तब गुरुदेव ने बताया कि 6 कोस तक फैले इस निर्जन स्थान पर केवल राक्षसी ताड़का का ही अधिकार है। यह ताड़का वन कहालता है। यहां आनेवाले किसी भी मनुष्य को वह जीवित नहीं लौटने देती। गुरुदेव आगे कहते हैं कि कभी यह स्थान बहुत ही सुंदर जनपद था। कलद और करुष नाम के दो विशाल नगर यहां की समृद्धि की गाथा गाते थे। फिर अगस्त मुनि के शाप से राक्षसी बनी ताड़का और उसके पुत्र मारीच की विनाशलीला के कारण यह राज्य उजाड़ हो गया।
अतः गुरुदेव के आदेश के कारण श्रीराम ने तड़का का वध किया तथा आगे चलकर तड़का के पुत्र कुंत एवं मारीच से युद्ध हुआ जब वो ऋषियों के यज्ञ में विध्वंस करना चाहते थे,श्रीराम ने बिना फर का बांध मारीच को मारा तो वो लंका में जाकर गिरा और उसे राम की शक्तियों का अंदाजा हुआ।



मारीच का माता सीता के हरण में रावण का सहयोग Why marich help ravan for sita haran?


जब शूर्पणखा ने रावण को अपने अपमान की कथा सुनाई तो रावण ने सीताहरण की योजना बनाई। सीताहरण के दौरान रावण ने मारीच की मायावी बुद्धि की सहायता ली।  रावण ने गुस्से से भरकर कहा कि राम-लक्ष्मण ने शूर्पणखा के नाक-कान काट दिए और अब हमें उनसे बदला लेना होगा। मारीच ने कहा- हे रावण, श्रीरामचंद्रजी के पास जाने में तुम्हारा कोई लाभ नहीं है। मैं उनका पराक्रम जानता हूं। भला इस जगत में ऐसा कौन है, जो उनके बाणों के वेग को सह पाए। 
 
रावण ने मारीच पर क्रोधित होकर कहा कहा- रे मामा! तू मेरी बात नहीं मानेगा तो निश्चय ही तुझे अभी मौत के घाट उतार दूंगा। मारीच ने मन ही मन सोचा- यदि मृत्यु निश्चित है तो श्रेष्ठ पुरुष के ही हाथ से मरना अच्छा होगा। 




रावण के माता सीता के हरण के लिए मारीच को क्यों चुना Why Ravan Picked Marich for this work?

मारीच परम मायावी और युद्ध कौसल में निपुण था, उसे माया के द्वारा अपने रूप को किसी भी प्रकार में बदलने में महारथ थी, साथ ही वो राजा भक्त और रावण का मामा भी था। अतः रावण उसके कौसल पर पूर्ण विस्वास था इसीलिए उसने सीता हरण के लिए मारीच की सहायता मांगी, और उसने मारीच को विवश कर दिया कि वो उसकी सहायता करें।

मारीच का श्रीराम द्वारा वध Marich Vadh by shriram:

मारीच ने पूछा- अच्छा बताओ, मुझे क्या करना होगा? रावण ने कहा- तुम एक सुंदर हिरण का रूप बनाओ जिसके सींग रत्नमय प्रतीत हो। शरीर भी चित्र-विचित्र रत्नों वाला ही प्रतीत हो। ऐसा रूप बनाओ कि सीता मोहित हो जाए। अगर वे मोहित हो गईं तो जरूर वो राम को तुम्हें पकड़ने भेजेंगी। इस दौरान मैं उसे हरकर ले जाऊंगा। मारीच ने रावण के कहे अनुसार ही कार्य किया और रावण अपनी योजना में सफल रहा। इधर राम के बाण से मारीच मारा गया।



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