google.com, pub-8785851238242117, DIRECT, f08c47fec0942fa0 श्रीकृष्ण ने सुभद्रा से अभिमन्यु के विषय मे क्या कहा! - पौराणिक दुर्लभ कथाएं

भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

21 January, 2020

श्रीकृष्ण ने सुभद्रा से अभिमन्यु के विषय मे क्या कहा!

अभिमन्यु कौन थे Who Was Abhimanyu?

अभिमन्यु महाभारत के नायक अर्जुन और सुभद्रा, जो बलराम व कृष्ण की बहन थीं, के पुत्र थे। वीरता, बुद्धिमानी और पौरुष का एक महान उदाहरण है महाभारत युग का ‘वीर अभिमन्यु’, जिसे अर्जुन-पुत्र के नाम से भी जाना जाता है। पाण्डवों में से सबसे कुशल और आकर्षक, इन्द्र देव द्वारा कुंती को वरदान में दिए गए अर्जुन को समस्त संसार उनके धनुर्धारी कौशल के लिए जानता है।


अभिमन्यु के गुरु श्रीकृष्ण कैसे बने How ShriKrishna become Teacher of Abhimanyu?

पांडवो में वनवास के कारण सुभद्रा द्वारिका में रहती थी और श्री कृष्ण की प्रिय बहन होने के कारण उनके पुत्र अभिमन्यु के गुरु बने थे श्रीकृष्ण और सारी विद्याएं दी थी। श्रीकृष्ण कहते थे कि ये भविष्य की धरोहर है और सबसे कम उम्र का महारथी बनेगा।



अभिमन्यु का महाभारत युद्ध मे भूमिका Role of abhimanyu in Mahabharat:

अर्जुन-पुत्र अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदने के लिए उसमें घुस गया। चक्रव्यूह में प्रवेश करने के बाद अभिमन्यु ने कुशलतापूर्वक चक्रव्यूह के छः चरण भेद लिए। इसके दौरान अभिमन्यु द्वारा दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण का वध किया गया। अपने पुत्र को मृत देख दुर्योधन के क्रोध की कोई सीमा ना रही। तब कौरवों ने युद्ध के सारे नियम भुलाकर ऐसा कदम उठाया जो इतिहास में कभी नहीं लिया गया। छह चरण पार करने के बाद अभिमन्यु जैसे ही सातवें और आखिरी चरण पर पहुंचा, तो उसे दुर्योधन, जयद्रथ आदि सात महारथियों ने घेर लिया। अपने सामने इतने सारे महारथी देख कर भी अभिमन्यु ने साहस ना छोड़ा। उन्होंने अभिमन्यु के रथ को घेर लिया और उसके घोड़ों को मार दिया।

अभिमन्यु ने महाभारत युद्ध मे किस किस महारथी से युद्ध किया Who fight with Abhimanyu in Mahabharat:

अभिमन्यु का कौशल सभी ने कुरुक्षेत्र युद्ध के 13वें दिन देखा, जब अभिमन्यु एक के बाद एक कौरवों के महारथियों को पराजित कर रहे थे। कौरव सेना भयभीत हो गई। वह समझ नहीं पा रहे थे कि किस प्रकार से अभिमन्यु को रोका जाए। कहते हैं कि अभिमन्यु द्वंद्व युद्ध में इतने माहिर थे कि कौरवों में शायद ही कोई ऐसा योद्धा था जो उन्हें पराजित कर सके। इसीलिए उन्हें पराजित करने के लिए कौरवों ने छ्ल का सहारा लिया। गुरु द्रोण द्वारा पाण्डवों को हराने के लिए चक्रव्यूह की रचना की गई। वे जानते थे कि चक्रव्यूह को भेदने की कला केवल अर्जुन को आती है, लेकिन अर्जुन-पुत्र की क्षमता से अनजान थे गुरु द्रोण।



अभिमन्यु की मृत्यु How Abhimanyu died:

अर्जुन-पुत्र अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदने के लिए उसमें घुस गया। चक्रव्यूह में प्रवेश करने के बाद अभिमन्यु ने कुशलतापूर्वक चक्रव्यूह के 6 चरण भेद लिए। इस दौरान अभिमन्यु द्वारा दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण का वध किया गया। अपने पुत्र को मृत देख दुर्योधन के क्रोध की कोई सीमा न रही। तब कौरवों ने युद्ध के सारे नियम ताक में रख दिए।
छह चरण पार करने के बाद अभिमन्यु जैसे ही 7वें और आखिरी चरण पर पहुंचे, तो उसे दुर्योधन, जयद्रथ आदि 7 महारथियों ने घेर लिया। अभिमन्यु फिर भी साहसपूर्वक उनसे लड़ते रहे। सातों ने मिलकर अभिमन्यु के रथ के घोड़ों को मार दिया। फिर भी अपनी रक्षा करने के लिए अभिमन्यु ने अपने रथ के पहिए को अपने ऊपर रक्षा कवच बनाते हुए रख लिया और दाएं हाथ से तलवारबाजी करता रहा। कुछ देर बाद अभिमन्यु की तलवार टूट गई और रथ का पहिया भी चकनाचूर हो गया।
अब अभिमन्यु निहत्था था। युद्ध के नियम के तहत निहत्‍थे पर वार नहीं करना था। किंतु तभी जयद्रथ ने पीछे से निहत्थे अभिमन्यु पर जोरदार तलवार का प्रहार किया। इसके बाद एक के बाद एक सातों योद्धाओं ने उस पर वार पर वार कर दिए। अभिमन्यु वहां वीरगति को प्राप्त हो गया।

अभिमन्यु की पत्नी और पुत्र Wife and Son of Abhimanyu:

अभिमन्यु का विवाह राजा विराट की पुत्री उत्तरा से हुआ। अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित, जिसका जन्म अभिमन्यु के मृत्योपरांत हुआ, कुरुवंश के एक मात्र जीवित सदस्य पुरुष थे जिन्होंने युद्ध की समाप्ति के पश्चात पांडव वंश को आगे बढ़ाया।

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