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25 June, 2019

जब भगवान राम धरती से गए तब हनुमान कहाँ थे। Story of Hanuman When Ram leave earth.

भगवान राम के अंत समय मे हनुमान कहाँ थे?

हम सब जानते है हनुमानजी भगवान राम के सबसे बड़े भक्त थे, अतः उन्हें भक्त शिरोमणि कहा जाता है। हनुमान जी जब से भगवान राम से मिले कभी उनसे दूर नही हुए। वो सुग्रीव के मंत्रिमंडल में जरूर रहते थे परंतु नित भगवान श्रीराम की सेवा में भी उपस्थित रहते थे। लेकिन जब भगवान राम का धरती में समय खत्म हो गया और वो सरयू में समाधि लेकर वैकुंठ चले गए तब उनके प्रिय भक्त हनुमान उपस्थित नही थे। तो जानते है कहाँ थे हनुमान:





कथा के अनुसार जब भगवान राम से मिलने काल आया और उसने यह सूचना दी कि आपने धरती पर रहने का जितना समय सुनिश्चित किया था वह पूर्ण होने वाला है, तो भगवान को एक चिंता हो गयी कि वो हनुमान को कैसे समझाएंगे क्योंकि हनुमान जी तो मानने वाले नही है और न ही भगवान से दूर रह सकेंगे, साथ ही हनुमानजी चिरंजीवी है अतः धरती पर उनका रहना भी जरूरी है।

अतः भगवान ने एक दिन अपनी एक अंगूठी जिसमे राम नाम अंकित था उसे धरती की एक दरार में गिरा देते है। जिसको खोजने के लिए हनुमान जी अति लघुरूप रख कर कूद जाते है। अंगूठी को खोजते खोजते वो पाताल लोक पहुंच जाते है, जहाँ उन्हें एक साधू मिलता है जो भोजन पका रहा था। हनुमान जी प्रतीक्षा करने लगते है कि साधु बाबा का भोजन हो जाय और फिर वो उनसे अंगूठी के बारे में पूछें।

परंतु वो साधु पहले एक रोटी बनाता फिर उसको खाता फिर दूसरी रोटी बनाता फिर उसको खाता । बार बार उसको ऐसा करते देख हनुमानजी से रह नही गया और उन्होंने उससे इस तरह भोजन का रहस्य पूछा।  महात्मा बोले कि अगर मैं सारी रोटियां बनाता हूँ और मृत्यु आजाए तो ब्यर्थ हो जाएगा, अतः मैं ऐसा कर रहा हूँ। 

हनुमानजी ने जब अंगूठी के बारे में पूंछा तो महात्मा एक स्थान की तरफ इशारा करते हुए बोले कि वहां देख लो अपनी अंगूठी। हनुमानजी ने देखा कि वहां तो अंगूठियों का ढेर लगा हुआ है जिसमे सब एक जैसी अंगूठी है और सब मे राम नाम अंकित है। जब हनुमानजी ने महात्मा से इसका रहस्य पूछा तो उन्होंने बताया कि हर बार युग की समाप्ति पर एक अंगूठी ऊपर से गिरती है और उसे खोजने एक वानर आता है। जब वो वापस जाता है तो श्री राम धरती पर से जा चुके होते है। 

महात्मा ने हनुमानजी बताया कि समय चक्र की तरह घूमता रहता है, एक के बाद दूसरा और हर बार एक के बाद दूसरा युग के आता है वो सभी पात्र और समय। यही हर बार भगवान धरती पर अवतार लेते है और अपनी लीला करते है और अब तुमको भी उनके वचनों का पालन करना चाहिए।



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