भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

19 May, 2019

पृथ्वी के आठ चिरंजीवी पुरुष जो आज भी जीवित है। Aath chirnjivi purush.

कौन है आठ चिरंजीवी महापुरुष:

अलग अलग पुराणो, कथाओं और मान्यताओं में कहा जाता है कि इस पृथ्वी पर आठ ऐसे महापुरुष है जो चिरंजीवी है अर्थात सदा के लिए जीवित है। इनसे कुछ पृथ्वी पर रक्षा के लिए जीवित है तो कुछ अपने किये के कारण श्राप वस जीवित है। ये महापुरुष है:

१) अश्वथामा
२) राजाबलि 
३) वेदव्यास 
४) हनुमान
५) विभीषण
६) कृपाचार्य
७) परशुराम 
८) मार्कण्डेय ऋषि

 


१) अश्वथामा:

अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचर्य के पुत्र हैं, तथा उनके मस्‍तक में अमरमणि विद्यमान है।  अश्वत्थामा ने सोते हुए पांडवो के पुत्रो की हत्या की थी, तथा अभिमन्यु के पुत्र को गर्भ में मारने के लिए ब्रह्मास्त्र छोड़ा था। जिस कारण भगवान कृष्ण ने उन्हें कालांतर तक अपने पापों के प्रायश्चित के लिए इस धरती में ही भटकने का श्राप दिया था। तथा मस्तक से मणि निकाल कर उस घाव को कभी न भरने और रक्त रिसाव करते रहे ऐसा श्राप दिया था।

२) राजा बलि:

राजा बलि प्रह्लाद के वंशज हैं। राजा बलि को महादानी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भगवान विष्णु के वामन अवतार को अपना सब कुछ दान कर दिया, अतः भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल का राजा बनाया और अमरता का वरदान दिया। 

३) वेद व्यास:

ऋषि व्यास ने महाभारत जैसे प्रसिद्ध काव्य की रचना की है। उनके द्वारा समस्त वेदों एवं पुराणो की रचना हुई। वेद व्यास, ऋषि पाराशर और सत्यवती के पुत्र हैं। ऋषि वेदव्यास भी अष्टचिरंजीवियो में शामिल हैं।

४) हनुमानजी:

सीता माता ने हनुमान को अशोक वाटिका में राम का संदेश सुनाने पर वरदान दिया था की, वे सदेव अजर-अमर रहेंगे। हनुमान जी श्रीराम के दूत है तथा वो सदा इस पृथ्वी पर विचरण करते है और भक्तों की रक्षा करते है।

५) विभीषण:

श्री राम ने विभीषण को अजर-अमर रहने का वरदान दिया था। विभीषण ने भगवान राम की महिमा जान कर युद्ध में अपने भाई रावण का साथ छोड़ प्रभु राम का साथ दिया।

६) कृपाचार्य:

कृपाचार्य शरद्वान गौतम के पुत्र हैं। वन में शिकार खेलते हुए शांतु को दो शिशु मिले जिनका नाम उन्होंने कृपि और कृप रखा तथा उनका पालन पोषण किया। कृपाचार्य कौरवो के कुलगुरु तथा अश्वत्थामा के मामा हैं। उन्होंने महाभारत के युद्ध में कौरवो को साथ दिया।

७) परशुराम:

परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था। परशुराम का पहले नाम राम था, लेकिन इस शिव के परम भक्त थे। उनकी कठोर तपश्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें एक फरसा दिया, जिस कारण उनका नाम परशुराम पड़ा।

८) मार्कण्डेय ऋषि

ऋषि मार्कण्डेय भगवान शिव के परम भक्त हैं। उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपश्या द्वारा महामृत्युंजय तप को शिद्ध कर मृत्यु पर विजयी पा ली और चिरंजीवी हो गए।




No comments:

Post a Comment