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09 April, 2019

माता नवदुर्गा के नौ रुपों की व्याख्या। Description of navrup of Nav durga.

मां दुर्गा के नौ रूप:


मां दुर्गा के नौ रूपों की विशेष पूजा नवरात्रि के पावन पर्व पर की जाती है। माता के ये नौ रूप वेद भगवान द्वारा ही प्रतिपादित है। देवी ने यह रूप देवताओं के कल्याण और भक्तों को अभयदान देने के लिए ही रखे है, भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करना माता का उदेश्य है।




माता के नवरूप इस प्रकार है:
१) शैलपुत्री
२) ब्रह्मचारिणी
३) चंद्रघंटा
४) कुष्मांडा
५) स्कंदमाता
६) कात्यायनी
७) कालरात्रि
८) महागौरी
९) सिद्धदात्री

माता के नौ रूपों की व्याख्या:



शैलपुत्री

१) शैलपुत्री:

नवरात्रि के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है, माता का यह नाम हिमालय राज के यहां पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण हुआ है। माता शैलपुत्री का वाहन वृषभ है। माता की दो भुजाएं है उन्होंने अपने दाहिने हाँथ में त्रिशूल एवं बाएं हाँथ में कमल पुष्प धारण किए है।


ब्रह्मचारिणी


२) ब्रह्मचारिणी

माता के दूसरे रूप में ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि में की जाती है। माता के इस नाम का अर्थ है ब्रह्म आचरण यानी तापश्वि का आचरण। माता ने भगवान चंद्रमौली को पति रूप में प्राप्त करने के लिए बड़ी घोर तपस्या की थी, तभी ऋषिमुनियों और देवताओं में माता के इस रूप को यह नाम दिया था।
माता ने इस रूप में स्वेत वस्त्र धारण किये है तथा एक हाथ मे तप की माला और दूसरे हाथ मे कमंडल धारण की है।


 चन्द्रघण्टा


३) चन्द्रघण्टा

नवरात्र में माता की तीसरे रूप चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। माता के इस रूप का नाम उनके मस्तक पर घण्टी के समान अर्धचंद्र को धारण करने के कारण है। माता इस रूप में सिंह पर सवार है तथा इनकी दस भुजाएं है जिसमे अनेक अस्त्र- शस्त्र धारण किये हुए है। माता का यह रूप भक्तों का शोक का विनाश करती है और कल्याणकारी है।


कुष्मांडा

४) कुष्मांडा

कुष्मांडा माता दुर्गा का रूप है जिनकी पूजा नवरात्रि के चौथे दिन में किया जाता है। माता के इस रूप की आठ भुजाएं है जिसके कारण इन्हें अष्ठभुजी देवी भी कहा जाता है। सिंह पर सवार माता ने अपने भुजाओं में अनेक अस्त्र धारण किये हुए है तथा एक हाथ मे कमंडल और एक हाथ मे जप की माला है। माता की कांति सूर्य के समान है क्योंकि इन माता वास सूर्य मंडल में है।



स्कंदमाता

५) स्कंदमाता

भगवान स्कन्द कुमार यानी कार्तिकेय की माता के कारण इनका नाम स्कंदमाता है, जिनका नवरात्रि के पंचमी को पूजा आराधना कि जाति है। माता का यह रूप अत्यंत सौम्य है जिन्हीने अपने गोद मे भगवान कार्तिकेय को बिठाए हुए है। इनकी चार भुजाएं है जिनमे कमल पुष्प धारण की है, तथा एक हाथ वर मुद्रा में है। कमल को आसन बनाने के कारण इन्हें पद्मआशना देवी भी कहा जाता है। स्कंदमाता की सवारी शेर है।


कात्यानी

६) कात्यानी

नवरात्रि के छठवें दिन माता कात्यानी की पूजा की जाती है। माता का यह नाम उनका कात्यायन ऋषि के घर पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण हुआ था।  माता के इन रूप की चार भुजाएं जिसमे एक हाथ वर मुद्रा, एक अभय मुद्रा में है तथा एक मे कमल और चौथे में तलवार धारण की है।
एक कथा के अनुसार श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए गोपियों ने इनकी पूजा यमुना तट पर की थी।



कालरात्रि

७) कालरात्रि

नवरात्रि में सातवे दिन माता कालरात्रि की पूजा की जाती है। माता का यह रूप घने अंधकार के समान काला है, इनके बाल बिखरे हुए है। माँ कालरात्रि की चार भुजाएं है तथा वाहन गधा है, ये भक्तों के अंधकारमय स्थितियों का नाश करने वाली है। माता की दहनी भुजाएं वर एवं अभय मुद्रा में है तथा बाई भुजाओं में खड्ग और कांटा धारण की हुई है।



महागौरी

८) महागौरी

वृषवाहना देवी महागौरी की पूजा नवरात्रि के आटवे दिन होती है। माता इस रूप में सभी आभूषण एवं श्वेत वस्त्र धारण की है। जब माता ने भगवान शिव को पति रूप में पाने की कठोर तपस्या की थी तो उनका स्वरूप काला हो गया था, अतः जब भगवान शिव प्रसन्न हो गए तो उन्होंने गंगा के पवित्र जल से उनके शरीर को साफ कराया तो माता का स्वरूप दूध के समान गोरा हो गया अतः उन्हें महागौरी कहा जाता है।



 शिद्धदात्री

९) शिद्धदात्री

वनरात्री के नवे दिन माता शिद्धदात्री की पूजा की जाती है। माता शिद्धदात्री आठ सिद्धियों को देने वाली माता है। इनकी उपासना मनुष्य को लौकिक एवं पारलौकिक सुखों को प्रदान कराने वाला है। चार भुजाओं वाली इन माता ने कमल को अपना आशन बनाया हुआ है।






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