google.com, pub-8785851238242117, DIRECT, f08c47fec0942fa0 वेदव्यासजी के जीवन एवं जन्म की कथा। Birth and Life Story of Vedvyasji in hindi. - पौराणिक दुर्लभ कथाएं

भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

05 March, 2019

वेदव्यासजी के जीवन एवं जन्म की कथा। Birth and Life Story of Vedvyasji in hindi.

वेदव्यास VedVyas:

चित्र साभार: Pinterest

वेद व्यास भारतीय साहित्य में सर्वोत्तम स्थान को प्राप्त हुए है, महान साहित्य के रचयिता वेद व्यास जी का जन्म लगभग 3000ई पूर्व हुआ था, इनके पिता महर्षि "परासर" और माता का नाम "मत्स्यगंधा" था जो बाद में "सत्यवती" के नाम से जानी गयी। परासर के पुत्र होने के कारण इन्हें "पारासर" नाम से भी जाना जाता है। तथा घोर तपस्या के कारण इनका वर्ण काला होने के कारण 'कृष्णवर्ण' नाम भी दिया गया। माना जाता है कि प्रत्येक द्वापर युग मे भगवान व्यास के रूप में अवतरित होते है तथा वेदों का विभाजन करते है अतः अब तक कुल अठ्ठाईस व्यास हो चुके है।
महाऋषि व्यास जी ने त्रिकालदर्शी थे और भविष्य को भी देख सकते थे, अतः उन्होंने देख लिया था कि कलयुग में मनुष्य कम बुद्धि और अल्प आयु वाला होगा जो वेदों का सम्पूर्ण अध्ययन नही कर पायेगा अतः उन्होंने वेदों को विभाजित करके चार वेद की रचना की।  जो इस प्रकार हैं: ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, और अथर्ववेद । वेदों के विभाजन के कारण इनका नाम वेद व्यास हुआ। साथ ही इन्होंने अठारह पुराणों की रचना की जिसमे रोचक कहानियों के माध्यम से वेदों के ज्ञान को सरल तरीके से प्रस्तुत किया। प्रसिद्ध हिन्दू धर्मग्रंथ महाभारत के रचयिता वेदव्यास जी है जो उनके जीवन के समय ही घटित हुई तथा वो खुद उसके पात्र है। इसकी रचना के समय लिखने का कार्य भगवान गणेश जी ने किया था। श्रीमद्भागवत गीता जो संसार का सबसे ज्यादा पड़े जाने वाला पुराण है वो भी महाभारत का अंश है।
वेदव्यासजी के एक पुत्र थे जिनका नाम शुकदेव था जिन्हें जन्म से ही वेद,पुराण और उपनिषदों का ज्ञान था। तथा उन्होंने ही राजा परीछित को श्रीमद्भागवत पुराण सुनाया था। तथा इन्होंने ही पिता से सुने हुए महाभारत की कथा को देवताओं को सुनाया था।

वेदव्यासजी के जन्म की कथा Birth Story of Vedavyas:

पौराणिक कथाओं के अनुसार सुधन्वा नाम के एक राजा थे। वे एक दिन बाकी राजाओं की तरह आखेट के लिये वन गये। उनके वन जाने के बाद ही उनकी पत्नी का गर्भ धारण का समय हो गया। उसने इस समाचार को अपने एक पक्षी के माध्यम से राजा के पास भिजवाया। समाचार पाकर महाराज सुधन्वा ने एक दोने में अपना वीर्य निकाल कर पक्षी को दे दिया जिसे लेकर वह पक्षी राजा की पत्नी के पास पहुँचाने आकाश में उड़ चला। मार्ग में उस पक्षी को एक दूसरा शिकारी पक्षी मिल गया, दोनों पक्षियों में युद्ध होने लगा। युद्ध के दौरान वह दोना पक्षी के पंजे से छूट कर यमुना में जा गिरा। यमुना में ब्रह्मा के श्राप से मछली बनी एक अप्सरा रहती थी। मछली रूपी अप्सरा दोने में बहते हुये वीर्य को निगल गई तथा उसके प्रभाव से वह गर्भवती हो गई। 
गर्भ पूर्ण होने पर एक निषाद ने उस मछली को अपने जाल में फँसा लिया, निषाद ने जब मछली को चीरा तो उसके पेट से एक बालक तथा एक बालिका निकली। निषाद उन शिशुओं को लेकर महाराज सुधन्वा के पास गया। महाराज सुधन्वा के पुत्र न होने के कारण उन्होंने बालक को अपने पास रख लिया जिसका नाम मत्स्यराज हुआ। बालिका निषाद के पास ही रह गई और उसका नाम मत्स्यगंधा रखा गया क्योंकि उसके अंगों से मछली की गंध निकलती थी। बड़ी होकर वह नाव खेने का कार्य करने लगी।
एक बार पराशर मुनि को उसकी नाव पर बैठ कर यमुना पार करना पड़ा। पराशर मुनि मत्स्यगंधा के सौन्दर्य पर आसक्त हो गये और बोले, "देवि! मैं तुम्हारे साथ सम्बंध बनाना चाहता हूँ।" मत्स्यगंधा ने कहा कि यह संभव नही है।
तब पराशर मुनि बोले, "बालिके! तुम चिन्ता मत करो। प्रसूति होने पर भी तुम कुमारी ही रहोगी।" इतना कह कर उन्होंने अपने योगबल से चारों ओर घने कुहरे का जाल रच दिया और मत्स्यगंधा के साथ भोग किया। तत्पश्चात् उसे आशीर्वाद देते हुये कहा, तुम्हारे शरीर से जो मछली की गंध निकलती है वह सुगन्ध में परिवर्तित हो जायेगी। 
ऋषि के कथन अनुसार वो गर्भवती हुई और एक बुद्धिमान और परम तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया जिनका नाम व्यास था । जन्म लेते ही वो बड़े हो गए और तपस्या हेतु वन में चले गए। जाते समय अपनी माता को वचन दिया कि विपत्ति या अव्यसक्ता के समय जब वो उनको बुलाएगी तो वो आजायेंगे।

उसके बाद उनकी माता मत्स्यगंधा से सत्यवती के नाम से जानी जाने लगी, जिनका विवाह शान्तनू के साथ हुआ जो गंगा पुत्र देवव्रत(भीष्म) के पिता थे।




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