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06 February, 2019

भगवान विष्नु के तीसरे अवतार: वराह अवतार की कथा। Varah Avtar of lord Vishnu.

वराह अवतार:

यह भगवान विष्णु के तीसरे अवतार है, जब भी पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है और पाप कर्म बढ़ जाते है तो मनुष्यो और धर्म की रक्षा के लिए भगवान विष्णु अवतार लेते है।
भगवान विष्णु ने वराहावतार रसातल में फसी हुई पृथ्वी को निकालने औऱ हिरण्याक्ष नामक असुर का वध करने के लिए लिया था।


कौन था हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप:

हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप महाऋषि कस्यप और दिति के पुत्र थे। महाऋषि कस्यप मरीचि के पुत्र थे और दिति दक्ष प्रजापति की पुत्री थी।
भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय को सनकादिक ऋषियों ने श्राप दिया था जिसके कारण उनका जन्म दिति के गर्भ से हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप के रूप में हुआ था।
ये दोनों असुर प्रवित्ति के थे और पहाड़ की तरह शाक्तिशाली थे । हिरण्यकश्यप ने भगवान व्रह्मा को प्रसन्न करके कई वरदान प्राप्त किये थे।


वराह अवतार की कथा:

भगवान विष्णु ने रसातल में पड़ी हुई पृथ्वी को बाहर निकलने के लिए वराह अवतार लिया था जिसमे उनका सारा सरीर भगवान नारायण का चरुर्भुज रूप था परंतु सर जंगली सुअर का था जिसकी बड़ी बड़ी दाढ़ थी। उन्होंने हांथो में शंख , चक्र, गदा और कमल पुष्प धारण किया था।
जब हिरण्याक्ष सारे संसार को आतंकित करके युद्ध की लालसा से वरुण देव के पास गया और वरुण देव को युद्ध के लिए ललकारा तो उन्होंने कहा कि तू मुझसे क्या युद्ध करेगा अगर तू अपने आप को शक्तिशाली मानता है तो विष्णु भगवान से युद्ध करके दिखा।


तब हिरण्याक्ष भगवान विष्णु से युद्ध करने के लिए देवऋषि नारद से विष्णु भगवान का पता पूछने गया, तो देवऋषि ने कहा कि वो रसातल में पड़ी पृथ्वी को निकालने गए है तुम वंही चले जाओ।
जब हिरण्याक्ष ने वराह रूपी भगवान विष्णु को युद्ध के लिए ललकारा तो उन्होंने पहने पृथ्वी को अपने दाढ़ में उठाकर बाहर लाये और उसके उपरांत हिरण्याक्ष से युद्ध करके उसका वध किया।

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