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14 February, 2019

भगवान विष्णु के सातवें अवतार: श्रीराम। Story of ShriRam in hindi.

भगवान विष्णु के अवतार श्री राम:



भगवान विष्णु के दसावतार में से सातवे अवतार है श्रीराम। भगवान विष्णु का रामावतार दैत्य और दानवों के अत्याचार से रसातल में जाति हुई पृथ्वी की रक्षा के लिए लिया था। भगवान ने यह अवतार लेकर पृथ्वी पर दानवो और दैत्यराज रावण का वध कर पृथ्वी के ऋषियों, मुनियों और आम जनमानस को संकट से मुक्त किया था।
भगवान राम ने केवल दानवो का दलन नही किया अपितु संसार के लिये अपने जीवन से बहुत कुछ सीखने के लिए दे गए। भगवान राम ने उच्च आदर्श, न्याय, नीति, सिद्ध्यान्त के नए आयाम कायम किये। उन्होंने पूरा जीवन मर्यादित रहकर जिया भले ही परिस्थिति अनुकूल रही हो या प्रतिकूल इसलिए भगवान राम को मर्यादापुरुषोत्तम कहा जाता है।
भगवान विष्णु ने श्रीराम का अवतार त्रेतायुग युग मे सूर्यवंशी अयोद्धया के राजा श्री दसरथ के पुत्र के रूप में लिया, उनकी माता कौसिल्या थी। उनके तीन भाई भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न थे, जो उनके पिता दसरथ जी की दो और पत्नियो माता कैकेयी और सुमित्रा के पुत्र थे। श्री राम जी का विवाह राजा जनक की पुत्री सीता के साथ हुआ था।


श्रीराम कथा का वर्णन कंहा मिलता है?

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श्रीराम के कथा का वर्णन "रामायण" महाकाव्य में मिलता है जिसे महाऋषि बाल्मीक जी ने लिखा था यह संस्कृत भाषा मे है। बाल्मीक जी के द्वारा लिखे जाने की वजह से इसे "बाल्मीकि" भी कहते है।
जब संस्कृत भाषा का कम हो गया तो अलग अलग महापुरुषों और संतों ने रामायण का अलग अलग भाषा मे अनुवाद अपने अपने तरीके से किया। ईनके अलावा विश्व भर में इनके अनुवाद किये गए है।
अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास जी ने 15वी सताब्दी में "रामचरितमानस" की रचना की जो सबसे ज्यादा प्रशिद्ध है। तुलशी कृत रामचरितमानस वाल्मीकि रामायण से सबसे ज्यादा समानता रखती है। इसमे श्रीराम को महानायक के रूप में मर्यादापुरुषोत्तम बताया गया है। तुलसीदास जी ने इस रामायण को साथ काण्डों में विभक्त किया है ये है 
१) बाल काण्ड २) अयोध्या काण्ड ३) अरण्या काण्ड ४) किष्किंधा काण्ड ५) सुंदर काण्ड ६) लंका काण्ड ७) उत्तर काण्ड।
तुलसीदास जी ने यह रचना छंदों और अलंकारों का इस्तेमाल करके किया है। अतः छंदों की संख्या के अनुसार बालकाण्ड सबसे बड़ा और अरण्याकाण्ड सबसे छोटा है।

तुलसीकृत रामायण के अनुसार श्रीराम कथा का संछिप्त वर्णन:

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जब दैत्वों के राजा रावण का अत्याचार पृथ्वी पर बहुत बढ़ गया और वो ऋषियों महात्मयो को धर्म कार्य ठीक से नही करने दे रहे थे तो सभी देवता, ऋषि मिलाकर और ब्रह्मा जी के साथ भगवान विष्णु के पास गए। जिनकी बात सुनकर विष्णु जी ने कहा कि वो रावण के साथ अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना के लिए श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर अवतार लेंगे।

बालकाण्ड: 

राजा दशरथ की तीन रानियां थी परंतु पुत्र नही थे इसलिए उन्होंने पुत्र कामेष्टि यज्ञ किया जिसके बाद उनके यंहा चार पुत्र हुए जिनमे सबसे बड़े श्रीराम माता कौशिल्या के गर्भ से, फिर भरत माता कैकेयी और लक्ष्मण और सत्रुहन माता सुमित्रा के गर्भ से हुए। बाल्य अवस्था मे ही उन सभी को विद्या अध्ययन के लिए गुरु वसिष्ठ के आश्रम में भेज दिया गया। फिर विद्या अध्ययन के पाश्चात वे सब किशोरावस्था में राजभवन में वापस आये।

अयोद्धयाकाण्ड:

एक दिन महाऋषि विश्वामित्र राजभवन आये तथा श्रीराम और लक्ष्मण को  राक्षसी ताडूका और उसके पुत्र सुबाहु और मारीच के आतंक को दूर करने हेतु सहायता के लिए ले गये। जंहा श्रीराम ने ताडका और सुबाहू का वध किया और मारीच को बिना फर(नोक) का तीर मारा तो वो हजारो योजन दूर लंका में जा गिरा। 
पथ्थर की सिला बनी अहिल्या को तारकर , जनक पुत्री सीता के स्वम्बर में गए जंहा शिवजी के धनुष का भंजन किया और सीता जी के साथ विवाह किया।
भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिला और वो चित्रकूट में चले गए , जंहा भरत मनाकर वापस लाने गए परंतु श्रीराम ने 14 वर्ष का वनवास स्वीकार उनके साथ उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण भी गए।

अरण्यकाण्ड:

कई असुरों का विनाश किया और विभिन्न ऋषि मुनियों से भेंट की। जिसके बाद अगस्त मुनि ने उन्हें पंचवटी में रहने को कहा। पंचवटी में सूर्पनखा की लक्ष्मण जी द्वारा नाक काटी और खर-दूषण का सेना सहित विनास हुआ।
रावण के मारीच की मदत से माता सीता का हरण किया। श्रीराम और लक्ष्मण सीता की खोज करते हुए सबरी के आश्रम गए , और फिर सुग्रीव से मित्रता के लिए किष्किंधा पर्वत पर गए।

किष्किंधा काण्ड:

श्रीराम की अपने परम भक्त हनुमानजी से मुलाकात हुई और उन्होंने श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता करवाई। जिसके पश्चात सुग्रीव के बड़े भाई बाली का वध करके सुग्रीव को उसका राज्य और पत्नी को श्रीराम ने वापस दिलवाया।
सुग्रीव के वानर सेना की मदत से माता सीता की खोज सुरु हुई सभी चारो दिशाओ में गए और हनुमानजी अंगद सहित दक्षिण दिशा में माता सीता की खोज में गए।

सुंदर काण्ड:

हनुमान जी 100 योजन का समुद्र लांघकर लंका गए, विभीषण की मदत से माता सीता से मिले। माता सीता को श्रीराम की मुद्रिका दी।
अशोक वाटिका उजाड़कर प्रहरियों को मारा, उनको बचाने आये रावण के पुत्र अकछय का वध किया। मेघनाद के हांथो बंदी बनकर रावण के राज्यसभा में गए। उसके बाद लंका दहन करके हनुमानजी वापस श्रीराम को सीता जी का संदेश और हाल बताया।
फिर श्रीराम सुग्रीव और वानर सेना की मदत से लंका पर चढ़ाई की, समुद्र तट पर विभीषण से मित्रता हुई और उनको लंका का राजा बनाने का वचन दिया।

लंकाकाण्ड:

नल-नील और वानर सेना ने रामसेतू का निर्माण किया जिसके साथ श्रीराम और वानर सेना लंका पहुची। राम-रावण युद्ध हुआ जिसमें रावण की अपने पुत्रों और भाई कुम्भकर्ण के साथ मृतु हुई।
माता सीता बंधन से मुक्त हुई, विभीषण को लंका का राजा बनाकर श्रीराम लक्ष्मण और सीता अयोध्या वापस आये। फिर श्रीराम का राज्याभिषेक कर अयोध्या का राजा बनाया गया।

उत्तरकाण्ड:

इस काण्ड में श्रीराम का माता सीता को त्यागना और माता सीता का बाल्मीकि जी के आश्रम में जाकर श्रीराम-सीता के पुत्रों लव,कुश को जन्म देना और पालन करने का प्रसंग है।
बाद में लव कुश का श्रीराम से मिलना और माता सीता का धरती में चले जाने का वर्णन है।
अंत मे श्रीराम का पृथ्वी पर समय खत्म होने के पश्चात वैकुंठ को चले जाते है।


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