भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

16 February, 2019

भगवान विष्णु के आठवें अवतार : श्रीकृष्ण की कथा। Story of Shrikrishna in hindi.

श्रीकृष्ण Shrikrishna:

भगवान विष्णु के दसावतार में आठवां अवतार है श्रीकृष्ण। भगवान विष्णु ने यह अवतार आसुरी सक्तियो के विनास और कंस के वध हेतु लिया था। भगवान के श्रीकृष्ण अवतार में यदुवंश में मथुरा में लिया था। तथा उनके पिता वासुदेव और माता देवकी थी। परंतु देवकी और वासुदेव, कंस के करावास में होने के कारण श्रीकृष्ण का लालन पालन गोकुल में यसोदा माता और नंदबाबा के यंहा हुआ था। भगवान के इस जन्म में बड़े भाई बलदेव(बलभद्र) और बहन सुभद्रा थी।
भगवान श्रीकृष्ण जगत कल्याणयक और प्रेम की पराकाष्ठा के रूप में अवतरित हुए थे। राधा-कृष्ण का अमर प्रेम और इनकी कथा हमेशा संसार के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।
भगवान में इन अवतार में बहुविवाह हुए उनकी रुकमणी और सत्यभामा सहित 8 मुख्य पटरानियां थी और कुल 16108 रानियां थी।

श्रीकृष्ण के जन्म की कथा:

जब मथुरा में कंस का आतंक बहुत ज्यादा बढ़ गया और बल पूर्वक अपने पिता उग्रसेन को बंदी बनाकर कारागृह में डाल दिया और खुद मथुरा का राजा बन गया। उसने अपनी बहन देवकी और अपने मित्र तथा देवकी के पति वासुदेव को भी काराग्रह में डाल दिया, क्योंकि देवकी विवाह के समय आकाशवाणी हुई थी कि "देवकी का आठवां पुत्र ही तेरा काल होगा और तेरा वध करेगा"।
कंस ने देवकी-वासुदेव के पहले छह पुत्रों को जन्म लेते ही मार डाला, सातवे पुत्र को माया के द्वारा वासुदेव की दूसरी पत्नी माता रोहिणी के गर्भ में डाल दिया गया, जिनसे बलदाउ जी (सेसनाग अवतार कहा गया है) का जन्म हुआ।
देवकी  के आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपक्ष की अष्ठमी को मध्यरात्रि में हुआ, जन्म लेते ही बेड़ियां खुल गयी, काराग्रह के द्वारपाल गहरी निंद्रा में चले गए , सारे दरवाजे खुल गए । श्रीकृष्ण के पिता बसुदेव उनको बांस की टोकरी में लेकर मथुरा से गोकुल में नंदबाबा के यंहा माता यशोदा के पास छोड़ आये।

श्रीकृष्ण जी की बाल लीलाओं:

भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल में बहुत सी बाल लीलाये की वे गोप ग्वाले के साथ गायो को चराया, माखन खाये, घर घर जाकर माखन चुराए, गोपियों की मटकी तोड़ी इत्यादी।
साथ ही कंस के द्वारा उनको मारने हेतु भेजे गए कई राक्षसों का वध किया, तथा जमुना जी मे रहने वाले अति विसेले नाग को भगाया और नाग के ऊपर नृत्य किये।
इंद्रा आदि देवताओं की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करवाई और गोवर्धन पर्वत को पानी उंगली में उठाकर गोकुल वासियो की रक्षा की और देवताओं के अभिमान का मर्दन किया।
रास लीलाये की तथा राधा-कृष्णा का प्रेम समूची मानव जाति के लिए प्रेरणा बनी। भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी की धुन के सब दीवाने थे, मनुष्य तो क्या पशु पक्षी भी ठहरकर आनंद उठाते थे।

कंस का वध तथा माता पिता की कंस के बन्दीग्रह से मुक्ति:

जब कंस का कोई भी असुर और राक्षस भगवान श्रीकृष्ण का कुछ नही कर पाए तो कंस ने उनको मथुरा बुलाया और मलयुद्ध का आमंत्रण दिया जंहा पर श्रीकृष्ण के हांथो कंस का वध हुआ। बाद में देवकी और पिता बसुदेव को को छुड़ाया, साथ कि कंस के पिता और अपने नाना उग्रसेन को छुड़ाया।

कंस वध के बाद का श्रीकृष्ण का जीवन:

कंस वध में उपरांत श्रीकृष्ण का ब्रतबंध हुआ और उज्जैन विद्या अध्ययन के लिए गए जंहा पर उनकी मित्रता सुदामा के साथ हुई थी। कंस के वध का प्रतिशोध लेने के लिए जरासंध बार बार मथुरा में आक्रमण करता था, तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी राजधानी द्वारिका बनाई और सभी मथुरा वासियो को वंहा पर ले गए।
महाभारत में भी भगवान श्री कृष्ण का बहुत बडा योगदान था, महाभारत उन्होने पांडवो का साथ दिया और अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया।




तो दोस्तों उम्मीद है आपको यह कथा पसंद आई होगी तो अपने सुझाव दे और कथा को  शेयर करे।

No comments:

Post a Comment