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01 February, 2019

भगवान विष्णु के प्रथम अवतार: मत्स्य अवतार की कथा। story of matsya avtar in hindi.

प्रथम अवतार: मत्स्य अवतार First Incarnation of Lord Vishnu

भगवान विष्णु संसार के रक्षा का दायित्व रखते है अतः जब भी पृथ्वी पर संकट होता है वो अवतरित होते है। अतः उन्होंने पृथ्वी के रक्षा हेतु प्रथम अवतार लिए जो मत्स्य अवतार था। यह अवतार उन्होंने सतयुग में अंत मे दानव हयग्रीव के अंत करने और वेदों की रक्षा के लिए लिया था।
Picture Source:Page of Padmanabhaswami temple

मत्स्य अवतरण की कथा:

एक बार ब्रह्मा के मुख से प्रतिपादित हुए वेदों को हयग्रीव नामक दैत्य ने चुरा कर समुंद्र में छुपा लिया जिसके कारण पृथ्वी पर ज्ञान का अभाव हो गया और चारो ओर अत्याचार बढ़ गया , तब पृथ्वी की रक्षा हेतु भगवान विष्णु ने अवतार लिया।
एक बार जब राजा मनु सरोवर में अपने हाँथ से सूर्य को अर्घ दे रहे थे तो उनके हाँथ में एक मछली आ गयी, और जब वो उसे जल में छोड़ने लगे तो उसने अपनी करुण ब्यथा सुनाई।
मछली ने कहा : राजन इस सरोवर में कई बड़े जीव रहते है जो हम जैसे छोटे जीवो को खा जाते है, अतः आप मेरी रक्षा करो।
मनु बहुत दयावान और भगवान विष्णु के परम भक्त थे, अतः उन्होंने अस्वाशन देते हुए कहा कि मेरा महल बहुत बड़ा है मैं तुम्हारी रक्षा करूँगा। और फिर उन्होंने अपने कमंडल में उसे रख लिया।
घर जाते जाते उस मछली का आकार बडा हो गया, मनु यह समझ ही नही पा रहे थे तो उन्होंने उस मछली को एक पात्र में जल के साथ रख दिया। परन्तु वह उस मछली को जिस भी बड़े पात्र में डालते उस मछली का आकार बड़ा हो जाता।
 जब मनु के बड़े से बड़ा पात्र कम पड़ने लगा क्योंकि मछली का आकार बढ़ता ही जा रहा था, तो उन्होंने उसे नदी में छोड़ दिया परंतु वो मछली उस नदी से भी बड़ी हो गयी, तो उन्होंने उसे समुन्दर में डाला।
फिर जब समुन्दर भी कम पड़ता दिखाई दिया तो मनु समझ गए कि ये भगवान की कोई माया है, और वो उसके शरण मे गए। 
तब भगवान ने उनको अपने चतुर्भुज रूप का दर्शन दिए और बताया कि सात दिनों के उपरांत महा प्रलय होने वाला है अतः तुम एक नौका बनाकर सभी जीव को उसमे रखो, सभी वनस्पति के बीज और सप्तऋषियों को भी लेकर चढ़ जाओ।

फिर भगवान ने मत्स्य रूप में उस दानव यहग्रीव से युद्ध कर उसका वध किया और वेदों को छुड़वाया।


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