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04 February, 2019

भगवान विष्णु के दूसरे अवतार: कुर्म अवतार की कथा। Story Of Kitna Avtar by Lord Vishnu.

भगवान विष्णु के कुर्मा अवतार की कथा:

भगवान विष्णु जगत के पालन करता है, अतः जब भी संकट की स्थिति होती है भगवान विष्णु जगत के पालन हेतु अवतरित होते है। इसी तरह उन्होंने दूसरे अवतार में कुर्म के रूप में देवताओ के संकट को दूर करने और उनकी मदत करने के लिए लिया था। कुर्म का अर्थ होता है कछुआ। भगवान विष्णु के इस अवतार की कथा समुंद्र मंथन से जुड़ी है जब देवताओं में असुरो के साथ मिलकर अपनी खोई हुई सक्तियो को प्राप्त करने के लिए समुंद्र मंथन किया था। इस कथा का वर्णन कई पुराणों में मिलता है।


इस कथा के अनुसार एक बार महाऋषि दुर्वाशा के श्राप के कारण देवता शक्ति विहीन हो गए थे, तब मौका देखकर असुरो में आक्रमण कर दिया और देवताओं को पराजित कर स्वर्ग में अधिपत्य जमा लिया। 
देवताओं में अपनी शक्ति के प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु के शरण में गए, तो भक्तवत्सल भगवान ने उनके कष्टों के निवारण हेतु समुद्र मंथन का उपाय बताया। और कहा कि आप लोग असुरो से संधि कर ले क्योंकि समुंद्र मंथन में उनके सहयोग की अव्यसक्ता होगी। तब देवताओं ने असुरो के राजा बलि से संधि कर ली, असुर भी मंथन के सहयोग के लिए राजी हो गए क्योंकि उनको अमृत पान की लालसा थी।

फिर मंदरांचल पर्वत को मथनी और वाशुकी नाग को रस्सी बनाकर मंथन कार्य आरंभ हुआ, परंतु जब मंदरांचल पर्वत डूबने लगा क्योंकि कोई आधार नही था तो भगवान विष्णु के कुर्मा अवतार धारण करके पर्वत को अपनी पीठ पर उठा लिया। इसतरह भगवान विष्णु के कुर्मा अवतार ने देवताओं के कष्टो का निवारण किया।
समुंद्र मंथन से विष, हलाहल, ऐरावत हांथी, उचस्राव घोड़ा, चंद्रमा, मेनका, पारिजात वृक्ष, माता लक्ष्मी, वारुणी(मदिरा) इत्यादि तथा अंत मे भगवान धन्वंतरि हाँथ में अमृत कलश के साथ प्रगट हुए।


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