भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

03 January, 2019

बैजनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा। Story of Baijnath Jyotirlinga.

बैजनाथ ज्योतिर्लिंग:

पहले के बिहार और अब के झारखंड में स्थित बैजनाथ ज्योतिर्लिंग जो बाबा धाम के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह शिव जी के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यंहा सावन के महीने में कावर से जल लाने कि प्रथा है। यंहा की कांवर यात्रा बहुत प्रसिद्ध है।

बैजनाथ की कथा:

एक बार शिव जी का परम भक्त रावण ने शिव जी की बड़ी तपश्या की और प्रसन्न कर लिया। जब भगवान भोलेनाथ ने उससे वरदान मांगने को कहा तो उसने शिवलिंग को लंका में स्थापित करने का वर मांगा।
तब शिव जी ने उसकी बात मान ली और शिवलिंग लंका ले जाने को दे दिया परंतु एक शर्त रखी कि इसको कंही जमीन पर न रखे क्योंकि जंहा पर ये शिवलिंग रख दिया जाएगा उसी जगह स्थापित हो जाएगा।
जब रावण उस शिवलिंग को लेकर जाने लगा तो देवताओं ने सोचा अगर ये शिवलिंग लंका ले गया तो अमर हो जाएगा, तो उन्होंने विष्णु जी की मदत मागी। भगवान विष्णु के आदेश से वरुण देव ने रंग दिखाया और रावण को बहुत जोर से लघुशंका हुई। वो व्याकुल हो उठा और एक ग्वाले को ज्योतिर्लिंग देकर लघुशंका करने चला गया।
उधर वो ग्वाला उस ज्योतिर्लिंग को जमीन पर रखकर चला गया। जब रावण वापस आया तो वो ज्योतिर्लिंग जमीन में रखा देखकर बहुत दुखी हुआ और बहुत जोर लगाकर उठाने का प्रयास किया, परंतु वो न उठा पाया।
फिर वो जल से अभिषेख कर के पूजा अर्चना की और चला गया। उसकी पूजा की प्रक्रिया को एक बैजू नामक भील देख रहा था और वो हर रोज उसी तरह पूजा करने लगा।
उसकी पूजा से प्रसन्न होकर शिव जी प्रगट हुए और उसी के नाम पर बैजनाथ ज्योतिर्लिंग से प्रसिद्ध होने का वर दिया।

सारांश Conclusion:

रावण बहुत बड़ा ज्ञानी और ईस्वर का बड़ा भक्त था परंतु उसका कर्म उसे बुरा बना दिया।

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