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18 January, 2019

सती सावित्री और वट सावित्री की कथा। Sati Savitri and Vat Savitri story in hindi.

सती सावित्री और वट सावित्री व्रत Sati Savitri and Vat Savitri Vrat:

सती सावित्री नारी शक्ति की मिसाल है जिन्होंने अपने त्याग, समर्पण और सतीत्व के दम पर यमराज से अपने पति का जीवन वापस लेकर आई थी। भारतीय इतिहास में बहुत नारियो का प्रसंग का वर्णन किया गया है परंतु सावित्री के सतीत्व का उदाहरण हमेशा पति परायण नारियो में सर्वोत्तम समझा गया है। भारत मे महिलाये वट सावित्री का व्रत करती है जिसमे सती सावित्री की कथा का वर्णन है।

कौन थी सती सावित्री Who was sati savitri in hindi.

पुराणों के अनुसार मग्रदेश मे राजा अश्वपति नामक राजा राज करते थे जिनकी सावित्री नामक पुत्री हुई जो परम तेजस्वी थी और इनका रूप सौंदर्य बहुत ही सुंदर था। जब उन्होंने युवा अवस्था को प्राप्त किया तब पिता की आज्ञा से उन्होंने सत्यवान को अपने पति के रूप में वरण किया था।


सती सावित्री की कथा Savitri Vrat katha in Hindi:

महिलाओं के द्वारा रखा जाने वाला व्रत है वट सावित्री जिसमे सती सावित्री की कथा कही जाती है, इस व्रत की पूजा वट के वृक्ष के नीचे की जाती है क्योंकि वट वृक्ष में भगवान शिव का वास होता है।
इस कथा के अनुसार राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने सत्यवान को अपने पति के रूप में वरण किया था। तभी एक दिन उनके भवन में भगवान विष्णु के परम भक्त नारद का आगमन हुआ। राजा अश्वपति ने उनका आदर सत्कार किया, उसके बाद सावित्री ने भी नारद मुनि का आशिर्वाद लिया। फिर राजा अश्वपति ने सावित्री और सत्यवान के विवाह की बात बताई ।
तो नारद जी ने बताया कि सत्यवान के पिता को राज विहीन कर दिया गया है और सत्यवान की आयु सीमा भी बहुत कम है, उसकी मृत्यु एक वर्ष पश्चात निश्चित है।
परंतु सावित्री नही मानी और कहा कि मैंने सत्यवान को ही पति के रूप में वरण किया है तो मेरा विवाह भी उन्ही से होगा। राजा अश्वपति भी मान गए और सत्यवती का विवाह सत्यवान के साथ हो गया।
एक वर्ष उपरांत जब दोनों जंगल मे लकड़ी और फल लेने गए तो सत्यवान बहुत दर्द हुआ और वो वट के वृक्ष के नीचे लेट गया , और उसकी मृतु हो गयी।
तभी वंहा यमराज आये और उसकी आत्मा को लेकर दक्षिण की ओर जाने लगे। सावित्री भी उनके पीछे चलने लगी तो यमराज ने पूछा तुम कहा जा रही हो तो सावित्री ने कहा कि मैं अपने पति के साथ जाऊँगी।
तो यमराज भी उसको अपने  पति के प्रति प्रेम देखकर पिघल गए और बोले कि मैं तुम्हारे पतिपरायणता से प्रसन्न हूँ तुम इसके जीवन दान के अलावा कोई और वरदान मांग लो क्योंकि इसकी आयु सीमा समाप्त हो चुकी है।
तो उसने अपने ससुर के राजपाठ की वापसी का वर मांगा, यमराज तथास्तु कहकर आगे चल दिये तब भी सावित्री पीछे चल रही देखकर यमराज ने एक और वरदान मांगने को कहा।
तो सावित्री ने पुत्रवान होने का वरदान मांगा, यमराज फिर तथास्तु कहकर चल दिये, पर सावित्री फिर भी पीछे चल रही थी। तो यमराज ने कारण पूछा तो सावित्री ने कहा कि अपने मुझे पुत्रवान होने का वरदान दिया है इसलिए आपको मेरे पति को जीवित करना होगा। तब यमराज उसके आतित्व से पिघल गए और उसके पति को जीवित कर दिया।


सारांश conclusion

सावित्री ने यह सिद्ध किया कि अगर स्त्री चाहे तो वो मरे हुए पति के प्राण यमराज तक से वापस ला सकती है, इसलिए नारी को लक्ष्मी का रूप और भगवान का आशिर्वाद समझना चाहिए और उसका सम्मान करना चाहिए। जिस घर मे स्त्री का सम्मान होता है वंहा हमेशा सम्पनता बनी रहती है।

तो दोस्तो आपको ये कथा कैसी लगी अपने सुझाव दे और शेयर करे।







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