भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

14 January, 2019

श्रीकृष्ण की दुर्लभ कथा। Rare story of Lord Krishna.

भगवान श्रीकृष्ण की दुर्लभ कथा:

भगवान श्रीकृष्ण को लीलाधर भी कहा गया है क्योकि वो नित्य लीलाये करते रहते थे। उन्ही मुरलीधर श्रीकृष्ण की एक उत्तम कथा है जो देवी रुक्मडी और सत्यभामा से जुड़ी हुई है।
जैसा कि सभी को पता है हमारे गिरधर की 16108 पटरानियां थी जिनमे से रुक्मणि और सत्यभामा का प्रसंग सबसे ज्यादा वर्णन है। देवी सत्यभामा को हमेशा यह अभिमान रहता था कि वो सबसे ज्यादा सुंदर और बैभवशाली है। अतः उनको ये लगता था कि सभी पटरानियों से ज्यादा गहने और जेवर उनके पास है।
एक दिन सत्यभामा के मन मे आया कि आज वो भगवान श्रीकृष्ण को अपने गहने और जेवरात से तौलेंगी, क्योंकि उनके पास गहने और जेवरातों की कोई कमी नही थी।

तब उन्होंने भगवान स्यामसुंदर को एक तुला में बिठा दिया और दूसरे पलड़े में गहने और जेवरात रखना सुरु कर दिया, परन्तु जब वो जेवरात रखते रखते थक गई परंतु तुला का भार भगवान वासुदेव की तरफ ही रहा तो वो हैरान रह गयी।
और सोचने लगी कि इतने आभूषण और गहने रखने बाद भी तुला झुक क्यों नही रहा है, परंतु वो लीलाधर की लीला को नही समझ पा रही थी।

तब वंहा देवी रुकमणी आयी और उन्होंने सारा कार्यक्रम देखा तो वो समझ गयी कि ये भगवान स्यामसुंदर की लीला है।
फिर क्या था उन्होंने तुरंत पूजा का सामान उठा कर लायी और पहले भगवान की पूजा की उसके उपरांत भगवान का चरणोंदल को उठा कर गहने वाले पालने पर रख दिया और फिर गहने वाला हिस्सा भारी हो गया और झुक गया।

परंतु सत्यभामा समझ नही पा रही थी तभी वंहा भगवान विष्णु के परम भक्त नारद मुनि पहुच गए और उन्होंने देवी सत्यभामा को समझाया कि भगवान पूजा में महत्त्व सोने चांदी या आभुषण नही अपितु भावनाओं का है।

सारांश conclusion

भक्ति और प्रेम से बड़ा कुछ नही होता और भगवान भी भक्त की भक्ति और प्रेम को देखते है, पूजा करने का सही ढंग भक्त को भगवान से मिला देता है।


तो दोस्तो आपको ये कथा कैसी लगी अपने शुझाव जरूर दे और शेयर करे।


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