भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

28 December, 2018

ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा। Rare Story of Onkareshvar jyotirlinga

ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग कि कथा 


एक बार की बात है जब भगवान विष्णु के परम भक्त ऋषि नारद मुनि घूमते हुए पर्वतराज विंध्य पर्वत पर पहुँच गये। विंध्य पर्वत ने बड़े आदर-सम्मान के साथ उनका स्वागत और पूजा की।

बातों में पर्वत राज कहने लगे कि मैं सर्वगुण सम्पन्न हूं, मेरे पास हर प्रकार के सम्पदा है, किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है। इस प्रकार के अहंकारी भाव को मन में लेकर विन्ध्याचल नारद जी के समक्ष खड़े हो गये। तब श्री नारद जी विन्ध्याचल के अहंकार का नाश की सोची।

नारद जी ने विन्ध्याचल को बताया कि तुम्हारे पास सब कुछ है, किन्तु मेरू पर्वत तुमसे बहुत ऊँचा है। उस पर्वत के शिखर देवताओं के लोकों तक पहुंचे हुए हैं। मुझे लगता है कि तुम्हारे शिखर वहां तक कभी नहीं पहुंच पाएंगे। इस प्रकार कहकर नारद जी वहां से चले गए।

उनकी बात सुनकर विन्ध्याचल को बहुत दुख हुआ।

उसने उसी समय निर्णय किया कि अब वह भगवान शिव की आराधना और तपस्या करेगा। इस प्रकार विचार करने के बाद वह मिट्टी का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की कठोर तपस्या करने लगा।

कई माह की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव उसकी तपस्या से प्रसन्न हो गये। उन्होंने विन्ध्याचल को साक्षात दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया। भगवान शिव ने प्रसन्नतापूर्वक विन्ध्याचल से कोई वर मांगने के लिए कहा।

विन्ध्य पर्वत ने कहा कि भगवन यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो हमारे कार्य की सिद्धि करने वाली अभीष्ट बुद्धि हमें प्रदान करें। विन्ध्यपर्वत की याचना को पूरा करते हुए भगवान शिव ने विन्ध्य को वर दे दिया।

उसी समय देवतागण तथा कुछ ऋषिगण भी वहाँ आ गये। देवताओं और ऋषियों के अनुरोध पर वहाँ स्थित ज्योतिर्लिंग दो स्वरूपों में विभक्त हो गया। एक लिंग ओंकारेश्वर और दूसरा लिंग ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध हुए।

ये भगवान शिव का चौथा ज्योतिर्लिंग है और शास्त्रों में इसे पर्मेश्वर लिंग कहा गया है। यह स्थान मध्य प्रदेश के इंदौर के पास स्थित है जो कि यमुना नदी के किनारे पर स्थापित है।


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