google.com, pub-8785851238242117, DIRECT, f08c47fec0942fa0 September 2020 - पौराणिक दुर्लभ कथाएं

भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

27 September, 2020

श्री हनुमान चालीसा चौपाई-17 हिंदी अनुवाद। Shrihanuman chalisa chupayi-17 hindi translation.

 


श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisha:


श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है जिन्होंने अवधि भाषा मे "श्रीरामचरितमानस" की रचना की थी, गोस्वामी जी ने श्रीराम के परम भक्त और अतुलित बल एवं बुद्धि के स्वामी श्रीहनुमान जी के वर्णन में हनुमान चालीसा की रचना की थी। गोस्वामी जी कहते है "हरि अनंत हरि कथा अनंता" अतः चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन तो असंभव है इसलिए अपने ज्ञान अनुआर अर्थ है:


 ॥चौपाई 17॥
                                                           

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना ।। 17

अर्थ

हे भगवान आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।




श्री हनुमान चालीसा चौपाई-16 हिंदी अनुवाद। Shrihanuman chalisa chupayi-16 hindi translation.

 

श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisha:

श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है जिन्होंने अवधि भाषा मे "श्रीरामचरितमानस" की रचना की थी, गोस्वामी जी ने श्रीराम के परम भक्त और अतुलित बल एवं बुद्धि के स्वामी श्रीहनुमान जी के वर्णन में हनुमान चालीसा की रचना की थी। गोस्वामी जी कहते है "हरि अनंत हरि कथा अनंता" अतः चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन तो असंभव है इसलिए अपने ज्ञान अनुआर अर्थ है:


॥चौपाई 16॥

   तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ।। 16 ।।


अर्थ

 तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा‘ हनुमान जी ने सुग्रीव को भगवान राम से मिलाकर बहुत उपकार किया और सुग्रीव को राजपाट दिलवाया। 




श्री हनुमान चालीसा चौपाई-15 हिंदी अनुवाद। Hanuman chalisa chaupayi 15 hindi translation.

 


श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisha:


श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है जिन्होंने अवधि भाषा मे "श्रीरामचरितमानस" की रचना की थी, गोस्वामी जी ने श्रीराम के परम भक्त और अतुलित बल एवं बुद्धि के स्वामी श्रीहनुमान जी के वर्णन में हनुमान चालीसा की रचना की थी। गोस्वामी जी कहते है "हरि अनंत हरि कथा अनंता" अतः चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन तो असंभव है इसलिए अपने ज्ञान अनुआर अर्थ है:



 ॥चौपाई 15॥
                                                           जम कुबेर दिगपाल जहां ते । कबि कोबिद कहि सके कहां ते ।। 15 ।।

अर्थ

धर्मराज यम भगवान सूर्य के पूत्र हैं, इनकी माता का नाम संज्ञा है। यमी (यमुना) इनकी बहन हैं। भगवान सूर्य का एक नाम विवस्वान भी है, अत: विवस्वान (सुर्य) के पुत्र होने के कारण ये वैवस्वत भी कहलाते हैं। ये धर्मरुप होने के कारण और धर्म का ठीक-ठीक निर्णय करने के कारण धर्म या धर्मराज भी कहलाते हैं। यम देवता जगत् के सभी प्राणीयोंके शुभ और अशुभ सभी कार्यों को जानते हैं, इनसे कुछ भी छिपा नहीं है। ये प्राणियों के भूत-भविष्य, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष में किए गये सभी शुभाशुभ कर्मों के प्रत्यक्ष साक्षी हैं, ये परिपूर्ण ज्ञानी हैं। नियामक होने के कारण इनका नाम यम है। महाराज यम दक्षिण दिशा के स्वामी हैं। दस दिक्पालो में इनकी गणना है। ये शनिग्रह के अधिदेवता हैं। शनि की अनिष्टकारक स्थिति में इनकी आराधना की जाती है। इसीप्रकार दीपावली के दूसरे दिन यम द्वितीया को यम दीप देकर तथा अन्य दूसरे पर्वोंपर इनकी आराधना करके मनुष्य इनकी कृपा प्राप्त करता है। प्रत्येक प्राणियों के शास्ता एवं नियामक साक्षात्् धर्म ही यम हैं। वे ही धर्मराज अथवा यमराज भी कहलाते हैं।





श्रीहनुमान चालीसा चौपाई 14 का हिंदी अनुवाद। Hanuman chalisa chaupayi 14 hindi translation.

 


श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisha:


श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है जिन्होंने अवधि भाषा मे "श्रीरामचरितमानस" की रचना की थी, गोस्वामी जी ने श्रीराम के परम भक्त और अतुलित बल एवं बुद्धि के स्वामी श्रीहनुमान जी के वर्णन में हनुमान चालीसा की रचना की थी। गोस्वामी जी कहते है "हरि अनंत हरि कथा अनंता" अतः चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन तो असंभव है इसलिए अपने ज्ञान अनुआर अर्थ है:



 ॥चौपाई 14॥
                                                           सनकादिक ब्रम्हादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ।। 14 ।।

अर्थ

तुलसीदासजी यहाँपर यह कहना चाहते हैं कि श्री हनुमानजी की प्रशंसा केवल भगवान रामने ही नहीं की अपितु सृष्टि के सर्जक ब्रम्हाजी तथा ब्रम्हाजी द्वारा उत्पन्न मानसपुत्र सनकादिक मुनि (श्रीसनक, श्रीसनातन,श्रीसनन्दन, एवं श्री सनत्कुमार), भगवान के मन के अवतार श्री नारदजी तथा आदिशक्ति माता सरस्वतीजी इत्यादि सभी हनुमानजी के गुणोंका गुणगान करते हैं । वे कहते हैं कि हम भी श्री हनुमानजी के गुणोंका तथा यश का वर्णन पूरी तरह से नहीं कर सकते, भक्ति की ऐसी परमोच्च स्थिति हनुमानजीने अपने कतृ‍र्त्व से प्राप्त की।




हनुमान चालीसा चौपाई 13 का हिंदी अनुवाद। Hanuman chalisa chaupayi 13 hindi translation

 


श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisha:


श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है जिन्होंने अवधि भाषा मे "श्रीरामचरितमानस" की रचना की थी, गोस्वामी जी ने श्रीराम के परम भक्त और अतुलित बल एवं बुद्धि के स्वामी श्रीहनुमान जी के वर्णन में हनुमान चालीसा की रचना की थी। गोस्वामी जी कहते है "हरि अनंत हरि कथा अनंता" अतः चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन तो असंभव है इसलिए अपने ज्ञान अनुआर अर्थ है:



 ॥चौपाई 13॥
                                                          सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ।। 13 ।।

अर्थ

जिसने जगत में आकर कृतकृत्यता का अनुभव किया, जिसने जगत की कीमत बढायी, वह श्रेष्ठ भक्त है । कृष्ण और राम, इन दोनों अवतारों ने इस सृष्टि में आकर इसकी महत्ता बढायी। उसी प्रकार श्री हनुमानजी ने भक्ति की महत्ता बढाई, इसीलिए ऐसे भगवान के परम भक्त के यश की सारा संसार प्रशंसा करता है । इतना ही नहीं स्वयं परमात्मा उन्हे अपने ह्रदय से लगाते हैं यह भक्ति का अंतिम फल है ।




हनुमान चालीसा चौपाई12 का हिंदी अनुवाद। Hanuman chalisa chaupayi 12 hindi translation.

 


श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisha:


श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है जिन्होंने अवधि भाषा मे "श्रीरामचरितमानस" की रचना की थी, गोस्वामी जी ने श्रीराम के परम भक्त और अतुलित बल एवं बुद्धि के स्वामी श्रीहनुमान जी के वर्णन में हनुमान चालीसा की रचना की थी। गोस्वामी जी कहते है "हरि अनंत हरि कथा अनंता" अतः चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन तो असंभव है इसलिए अपने ज्ञान अनुआर अर्थ है:



रघुपति कीन्ही बहुत बडाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।।12।।

अर्थ

तुलसीदासजी लिखते हैं कि हनुमानजी की प्रशंसा करते हुए भगवान कहते हैं कि ‘तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो’ यानी तुम मेरे हो यह भगवान अपने मुख से भक्त के लिये कहना यह भक्ति का अन्तिम फल है ।