google.com, pub-8785851238242117, DIRECT, f08c47fec0942fa0 February 2020 - पौराणिक दुर्लभ कथाएं

भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

10 February, 2020

श्री हनुमान चालीसा चौपाई-4 हिंदी अनुवाद। Shrihanuman chalisa chupayi-4 hindi translation.


श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisha:


श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है जिन्होंने अवधि भाषा मे "श्रीरामचरितमानस" की रचना की थी, गोस्वामी जी ने श्रीराम के परम भक्त और अतुलित बल एवं बुद्धि के स्वामी श्रीहनुमान जी के वर्णन में हनुमान चालीसा की रचना की थी। गोस्वामी जी कहते है "हरि अनंत हरि कथा अनंता" अतः चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन तो असंभव है इसलिए अपने ज्ञान अनुआर अर्थ है:


 ॥चौपाई 4॥
                                                           ॥कंचन बरन बिराज सुबेसा, 
                                                                 कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥

अर्थ

हे भगवान आपका शरीर सुनहरे रंग का है, अपने अपने शरीर मे सुंदर वस्त्र तथा कानो में कुंडल धारण किया हुआ है। आपके सुंदर घुंघराले बालों के कारण आप अत्यंत सोभायमन हो रहे है।





श्री हनुमान चालीसा चौपाई-3 हिंदी अनुवाद। Shrihanuman chalisa chupayi-3 hindi translation.

श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisha:

श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है जिन्होंने अवधि भाषा मे "श्रीरामचरितमानस" की रचना की थी, गोस्वामी जी ने श्रीराम के परम भक्त और अतुलित बल एवं बुद्धि के स्वामी श्रीहनुमान जी के वर्णन में हनुमान चालीसा की रचना की थी। गोस्वामी जी कहते है "हरि अनंत हरि कथा अनंता" अतः चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन तो असंभव है इसलिए अपने ज्ञान अनुआर अर्थ है:


॥चौपाई 3॥

   ॥महावीर विक्रम बजरंगी, 
   कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥


अर्थ

हे वीरो के वीर महावीर भगवान आपका अंग बज्र के समान है और आप विशेष कार्य और पराक्रम करने वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालों के साथी एवं सहायक है।





06 February, 2020

श्री हनुमान चालीसा चौपाई-2 हिंदी अनुवाद। Shrihanuman chalisa chupayi-2 hindi translation.

श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisha:

श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है जिन्होंने अवधि भाषा मे "श्रीरामचरितमानस" की रचना की थी, गोस्वामी जी ने श्रीराम के परम भक्त और अतुलित बल एवं बुद्धि के स्वामी श्रीहनुमान जी के वर्णन में हनुमान चालीसा की रचना की थी। गोस्वामी जी कहते है "हरि अनंत हरि कथा अनंता" अतः चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन तो असंभव है इसलिए अपने ज्ञान अनुआर अर्थ है:



॥चौपाई २॥

॥ राम दूत अतुलित बलधामा ।
अंजनी पुत्र पवन सुत नामा ॥२॥

अर्थ:

श्री हनुमान जी! आप श्रीराम के दूत है जो श्रीराम की सेवा में हमेशा तत्पर रहते है। हे अंजनी के पुत्र तथा पवन देव के पुत्र आपके समान कोई और बलवान नही है, अर्थात आप सम्पूर्ण बल के स्वामी है और आपकी तुलना किसी और से नही की जा सकती है।







अन्य चौपाई के अर्थ विस्तार सहित:



04 February, 2020

हनुमान चालीसा चौपाई 1 का हिंदी अनुवाद। Hanuman Chalisa Chaupayi-1 Hindi anuwad.

श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisha:

श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है जिन्होंने अवधि भाषा मे श्री राम चरित मानस की रचना की था, गोस्वामी जी ने श्री राम के परम भक्त और अतुलित बल एवं बुद्धि के स्वामी श्री हनुमान जी के वर्णन में चालीसा की रचना की थी। गोस्वामी जी कहते है "हरि अनंत हरि कथा अनंता" अतः चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन तो असंभव है इसलिए अपने ज्ञान अनुआर अर्थ है:



॥चौपाई १॥

॥जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥




अर्थ:

श्री हनुमान जी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है जिसका कोई ओर या छोर नही है न ही इसका आदि और अंत है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों, स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति फैली हुई है, और इस कीर्ति से ये तीनो लोको में उजाला फैला हुआ है।



चौपाई के अर्थ विस्तार सहित:



हनुमान चालीसा दोहा-1 का हिंदी अर्थ विस्तार सहित। Description of Hanuman Chalisha Doha-1

श्री हनुमान चालीसा Hanuman Chalisha:

श्री हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी है जिन्होंने अवधि भाषा मे श्री राम चरित मानस की रचना की था, गोस्वामी जी ने श्री राम के परम भक्त और अतुलित बल एवं बुद्धि के स्वामी श्री हनुमान जी के वर्णन में चालीसा की रचना की थी। गोस्वामी जी कहते है "हरि अनंत हरि कथा अनंता" अतः चालीसा का सम्पूर्ण वर्णन तो असंभव है इसलिए अपने ज्ञान अनुआर अर्थ है:




॥दोहा॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ 
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥




अर्थ:

श्री गुरु महाराज (जिन्होंने श्री यानी लक्ष्मी और सरस्वती का ज्ञान दिया) के चरण कमलों की धूलि को अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाले है।

हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूं। आप तो जानते ही हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्‍बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखों व दोषों का हरण(क्योंकि हनुमानजी सम्पूर्ण ग्रहो के स्वामी है अतः वो दुःखो को ऐसे दूर करते है भक्त को पता भी नही चलता) कर दीजिए।






चौपाई के अर्थ विस्तार सहित: