google.com, pub-8785851238242117, DIRECT, f08c47fec0942fa0 भगवान ब्रह्मा कि पूजा क्यों नही होती तथा उनका एक ही मंदिर क्यों है। Why only one temple of lord brahma. - पौराणिक दुर्लभ कथाएं

भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

14 May, 2019

भगवान ब्रह्मा कि पूजा क्यों नही होती तथा उनका एक ही मंदिर क्यों है। Why only one temple of lord brahma.

भगवान ब्रह्मा की पूजा और मंदिर को लेकर विवाद क्यों:

वेदों, पुराणों, उपनिषदों और अनेक ग्रंथों से यही निष्कर्ष निकलता है कि त्रिदेव ही श्रेष्ठ है जी है परम पिता तथा जगत की रचना करने वाले भगवान व्रह्मा, संसार के पालन कर्ता भगवान विष्णु तथा संहारक भगवान शिव शंकर। परंतु भगवान विष्णु और भगवान शिव के अनेक मंदिर स्थित है तथा घर घर मे इनकी पूजा-अर्चना की जाती है, साथ ही समस्त देवी-देवताओं की पूजा-आराधना की जाती है। लेकिन संसार के रचयिता भगवान व्रह्मा की पूजा क्यों नही होती तथा राजस्थान के पुष्कर में स्थिर एक मात्र विशेष मंदिर क्यों है, यह जानने की उत्सुकता होती है।




इसके अलग-अलग कारण तथा कथाये अलग अलग पुराणो में मिलती है जो इस प्रकार है:

१) शिव पुराण की कथा:

शिव पुराण में वर्णित कथा के अनुसार परमात्मा शिव है जिनकी प्रेरणा से भगवान विष्णु का अवतरण हुआ तथा विष्णु जी के नाभि से एक कमल निकला जिशसे व्रह्मा जी का जन्म हुआ। अतः एक बार ब्रह्मा और विष्णु जी मे श्रेष्ठता का विवाद हो गया, तभी वहां एक अग्नि स्तंभ उत्पन्न हो गया तथा आकाशवाणी हुई कि जो इस स्तंभ के छोर को खोज लेगा वही श्रेष्ठ होगा। फिर दोनों देवता स्तंभ का छोर खोजने चल दिये, ब्रह्मा ऊपर तथा विष्णु नीचे की ओर गए।
बहुत समय बीतने के बाद भी जब छोर नही मिला तो दोनों लौट आये , तथा व्रह्मा जी मे झूठ बोला कि छोर मिल गया। तभी वह स्तंभ शिव रूप में परिर्वतित हो गया औऱ व्रह्मा जी का झूठ पकड़ा गया। इसी कारण उनकी पूजा नही होती।



२) पद्मपुराण की कथा:

कथा के अनुसार ब्रह्मा जी एक यज्ञ करना चाहते थे जिसमें उनकी पत्नी का रहना जरूरी था। उनकी पत्नी जिनका नाम "सावित्री" है जो किसी कारण वहां नही पहुच पाई और यज्ञ का समय बीत रहा था। अतः वृह्मजी ने एक ग्वाल की पुत्री "गायत्री" से विवाह कर लिए और यज्ञ करने लगे, तभी वहां सावित्री आ गयी।
अपने स्थान पर किसी अन्य स्त्री को देखकर वो क्रोधित हो गयी औऱ उन्होंने वृह्मजी को श्राप दे दिया कि उनकी इस संसार मे कई पूजा नही होगी और जो भी करेगा उसका विनाश हो जाएगा।
सभी देवता भयभीत हो गए और माता को शांत करने का प्रयत्न करने लगे, तब वो शांत होकर बोली मेरा कथन असत्य नही होगा परंतु इसी स्थान में इनकी पूजा हो सकती है। वही स्थान राजस्थान का पुष्कर मंदिर है।

३) तीसरी कथा:

यह कथा भी अनेक पुराणो में मिलती जी एक बार स्वर्ग की अप्सरा जिसका नाम "मोहिनी" था, वृह्मजी पर आसक्त हो गयी। और उन्हें रिझाने के लिए प्रयत्न करने लगी। 
वह उन्हें रिझाने के लिए नृत्य कर रही थी और जाकर उनके निकट बैठ गयी, तभी वहां शप्तऋषी आ गए। उन्होंने वृह्मजी से पूछा यह स्त्री कौन है तो वृह्मजी ने कहा कि यह एक अप्सरा है जो नृत्य कर रही थी और थक कर बैठ गयी है, ये मेरी पुत्री के समान है। शप्तऋषी तो अंतर्यामी थे उन्होंने घटना देख ली और चले गए।
परंतु अप्सरा मोहिनी क्रोधित हो गयी कि वृह्मजी ने उसका अपमान किया है, वो उनके सामने प्रेम प्रस्ताव लेकर आई थी और ब्रह्मा जी ने उसे पुत्री कह दिया। अतः उसने ब्रह्माजी को श्राप दे दिया कि उनकी कोई पूजा नही करेगा।



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