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10 May, 2019

नचिकेता की कथा। Story of Nachiketa.

नचिकेता का परिचय:

नचिकेता एक परम तेजस्वी ऋषिकुमार थे जिनके पिता का नाम वाजश्रव था। अपने तपोवल और हठ से यमराज को विवश करने वाले वो इतिहास के दूसरे व्यक्ति थे, इनके अलावा सती सावित्री ने किया था। वाजश्रवस पुत्र नचिकेता यमराज को विवश कर व्रह्माज्ञान एवं मृत्यु के रहस्यों का ज्ञान प्राप्त किया था। नचिकेता कि कथा का वर्णन कई ग्रंथों एवं पुराणो में मिलता है, कुछ जगह उनके पिता का नाम उद्दालक कहा गया है।





नचिकेता की कथा:

एक बार नचिकेता के पिता ने विश्वजीत नामक यज्ञ किया था जिसमे उंन्होने अपनी सारी संपत्ति दान देने का संकल्प किया था, अतः यज्ञ की समाप्ति के दिन चारो ओर से अनेक ऋषिमुनि पधारे हुए थे। परंतु यज्ञ की समाप्ति पर इनके पिता जब दान देना शुरू किए तो उन्होंने ऐसी गायों का दान देना शुरू किया जो बीमार , बूढ़ी और दूध देना बंद कर दी थी।

नचिकेता ने जब अपने पिता को ऐसा करते हुए देखा तो उन्हें दुख हुआ तथा उंन्होने अपने पिता के पास जाकर जिद की उन्हें भी किसी को दान दे, तथा बार बार अपने पिता को हठ करके पूछने लगे कि वो उनको किसे दान देंगे। बार बार पूछने पर उनके पिता परेशान होकर बोल दिए कि जा तुझे मृत्यु अर्थात यमराज को दान देता हूं।

पिता की इस बात को सुनकर नचिकेता तनिक भी दुःखी नही हुए और तुरंत यमपुरी की ओर प्रस्थान कर गए। बहुत परिश्रम के उपरांत वो यमपुरी पहुच गए वहां पर यमदूतों के द्वारा पूछे जाने पर नचिकेता ने बताया कि उनके पिता ने उनका दान यमराज को कर दिया है अतः वो उनसे मिलने आये है। दूतों ने बताया कि यमदेवता अभी यहां नही है तो नचिकेता ने यमदेव की प्रतीक्षा में बैठ गए।

प्रतीक्षा करते करते तीन दिन बीत गए औऱ जब तीन दिन बाद जब यमराज आये तो दूतों ने नचिकेता के बारे में बताया। यमराज नचिकेता के बारे में जानकर बहुत प्रसन्न हुए, और उन्होंने नचिकेता से तीन वरदान मांगने को कहा।

नचिकेता ने पहला वरदान मांगा की "उसके पिता का उसके प्रति क्रोध शांत हो जाय और वो पहले जैसे प्यार करने लगे"

यमराज ने तथास्तु कहा और मान गए।

नचिकेता ने दूसरा वरदान मांगा की "स्वर्ग कैसे प्राप्त हो उसका उपदेश दे"

यमदेव थोड़ा सकुचाये परंतु वो मान गए।

नचिकेता ने तीसरा वरदान मांगा "मृत्यु तथा आत्मा के रहस्य का उपदेश दे"

यमदेवता तो यह वरदान देने से मना किया बोले यह संसार का परम गोपनीय रहस्य है जिसका वर्णन किसी के सम्मुख करने की मनाही है, अतः उन्होंने ने नचिकेता को कहा कि वो कोई दूसरा वरदान मांग ले।

लेकिन नचिकेता इसी वरदान को पाने का हठ करने लगे, बाद मव उनके इस हठ से यमदेव हार गए और संसार का परम गोपनीय रहस्य का वर्णन नचिकेता के सम्मुख किया।




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