भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

12 April, 2019

जब हनुमान जी के डर से शनि देव ने स्त्री रूप रखा था। Story of Hanuman ji and shani dev.

हनुमान जी एवं शनि देव की कथा:

शनि देव के बारे में सभी जानते है, जिसके ऊपर इनकी दसा बिगडती है तो उस इंसान के लिए जीवन मुश्किल हो जाता है। तथा शनि की साढ़ेसाती, आढ़ायीया और वक्र दृष्टि के बारे में सुनते ही लोगो के पसीने छूट जाते है। वही हनुमानजी संकट मोचन है, उनकी भक्ति से ग्रहों की दशाओं को ठीक किया जाता है। हनुमानजी को यह वरदान है कि वो अपने भक्तों की रक्षा के लिए ग्रहों की दशाओं को ठीक कर देते है।

कष्टभंजन हनुमानजी


शनि देव की दशाओ की सुधार के लिए शनिवार को हनुमानजी के ऊपर तेल एवं सिंदूर चढ़ाने का रिवाज है।


जब हनुमानजी के क्रोध से बचने के लिए शनि देव ने स्त्री का रूप रखा था:


गुजरात में भावनगर में सारंगपुर में हनुमानजी का एक विशेष मंदिर है जिसे कष्टभंजन हनुमानजी मंदिर नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की एक खास बात है कि यहां पर स्थित हनुमानजी के पैरों के पास एक स्त्री है, हम सब जानते है कि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी है तो उनके पास स्त्री कैसे है।
इसकी बड़ी अनोखी कथा है, इस कथा के अनुसार एक बार शनि देव का प्रकोप मनुष्यों के ऊपर बहुत अधिक हो गया था। जिशसे परेशान मनुष्य महाबली हनुमानजी की शरण मे गए, तथा भक्तों ने हनुमानजी से शनिदेव के प्रकोप के बारे में बताया। भक्तों के कष्टों को देखकर हनुमानजी बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने शनिदेव को दंड देने के लिए उनके लोक में गए।


कष्टभंजन हनुमान मंदिर


जब शनिदेव को पता चला कि हनुमानजी बहुत क्रोध में उनके पास आ रहे है तो उंन्होने एक उपाय सोचा उनको पता था कि हनुमानजी स्त्रियों के ऊपर क्रोध नही करते अतः उन्होंने स्त्री का रूप धारण कर लिए। तथा जब हनुमानजी आये तो उनके पैरों में गिरकर माफी मांगी। 
हनुमानजी ने उनका यह रूप देखकर अपने क्रोध को छोड़कर शनिदेव को छमा कर दिए तथा भक्तों के संकट को खत्म करने को कहा।

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