भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

22 April, 2019

हनुमान जी के जन्म की कथा। Birth Story of Hanuman ji.

हनुमान जी का परिचय:

महाबली हनुमान जी का जन्म वानर कुल में हुआ उनकी माता का नाम अंजना तथा पिता केसरी है। हनुमान जी का जन्म चैत्र मास की पूर्णिमा को हुआ जो मंगलवार का दिन था। हनुमान जी भगवान श्री राम को अपना स्वामी मानते है तथा उन्ही की सेवा को अपना परम धर्म मानते थे, इसीलिए उन्हें भक्तशिरोमणि कहा जाता है। हनुमान जी अति वलवान तथा बुद्धिमान है। उन्होने अपनी बुद्धि और बल से सिर्फ अपने भक्तों के संकट दूर नही किये अपितु श्रीराम के भी संकट दूर किये, अतः उन्हें संकटमोचन कहा जाता है।


हनुमान जी को पवनपुत्र तथा भगवान शिवजी का रुद्र रूप भी माना जाता है। हनुमान जी के गुरु स्वयं सूर्य देव है, उनके अलावा भी हनुमान जी को अनेक देवताओं और वृह्मदेव से कई वरदान प्राप्त है। 

हनुमानजी के जन्म की कई कथायों का वर्णन अनेक ग्रंथों एवं पुराण में है। उन मे से कुछ कथाये इस प्रकार है:


१) कथा: जब माता अंजना ने पवनदेव की तपस्या की थी

माता अंजना और वानर राज केसरी के विवाह के बहुत अधिक समय बीत जाने के बाद में भी जब कोई संतान नही हुई तो वो चिंता करने लगे। माता अंजना शिवजी की बहुत बड़ी भक्त थी, अतः उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान शिव की तपस्या करने लगीं। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने पवन देव को भेजा जिन्होंने माता अंजना को वरदान दिए कि उन्हें पुत्र होगा जो पवन देव की तरह तेजस्वी तथा वलवान होगा, तथा उसके अंदर समस्त गुण भी रहेंगे।


२) कथा : शिव के रुद्र अवतार के रूप में जन्म की कथा

वेसव्यास जी के पुराण के अनुसार एक समय पृथ्वी पर जल शून्य हो गया था, तब पृथ्वी पर पुनः जल की के संचार के लिये सभी देवता गण भगवान महादेव की शरण में गए तथा समस्या के निवारण की विनती की। भगवान शिवजी ने अपने सभी रुद्रों को बुलाकर कहा कि तुम मे से किसमे समर्थ है पृथ्वी पर पुनः जल के संचार के लिए। तब उनमें से 11वे रुद्र जिनका नाम "हर " था बोले कि मेरे अंतःकरण में जल व्याप्त है मैं जल का संचार कर सकता हु परंतु मुझे अपने शरीर को गलाना पड़ेगा, और फिर उन्होंने ऐसे ही किया। भगवान शिवजी ने अपने रुद्र "हर" से कहा की तुम्हारे अस्तित्व का अंत नही होगा और उन्ही रुद्र के अंश का मत अंजना के यहां हनुमान रूप में जन्म हुआ।


३) कथा : जब मोहनी रूप देखकर स्खलित हुआ था शिवजी का वीर्य


पैराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के उपरांत भगवान विष्णु में मोहनी रूप रखकर देवताओं को अमृत पान करवाया था। उस घटना के उपरांत एक दिन शिवजी ने भगवान विष्णु से पुनः उस मोहनी रूप को दिखाने की प्राथना की , भगवान शिव की प्रार्थना को मानकर विष्णु भगवान में वही मोहनी रूप रखा। जिसे देखकर शिवजी मोहित हो गए और उनका वीर्य स्खलित हो गया। तभी सप्तऋषियों ने उनके वीर्य को संग्रहित कर लिया था। तथा जब माता अंजना ने पुत्र प्राप्ति के लिए शिव आराधना की तो उनसे प्रसन्न हो शिवजी ने पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया तथा पवन देव के द्वारा , माया से उस शप्तऋषी के पास एकत्रित वीर्य को अंजना के गर्भ में डाला गया, और महाबली हनुमानजी का जन्म हुआ।

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