भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

12 March, 2019

महातपस्विनी शबरी कि कहानी। Story of Shabri in hindi.

कौन थी शबरी Who was Shabri?

रामचरितमानस के अरण्यकाण्ड में जब श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण जी के साथ माता सीता की खोज कर रहे थे तब पाम्पा सरोवर के पास मतांगमुनि के आश्रम में श्रीराम की अपने परम भक्त एवं भील जाती कि महातपस्विनी शबरी से मुलाकात हुई। श्री राम ने उन्हें माता कह कर संबोधित किया था, तथा उनके जुंठे बेर भी खाए। गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस प्रसंग में माता शबरी और श्रीराम जी के साथ जिस तरह से प्रस्तुत किया वो इस देश के जातिगत कुरीति को खत्म करने का प्रयास था , तथा यह अनूठा उदाहरण दिया कि भगवान अपने भक्तों में भेद नही करते।


माता शबरी के जीवन की कथा Story of Mata Shabri:

भगवान राम के जीवन की कथा सर्वप्रथम महाऋषि बाल्मीकि जी लिखी तथा बाद में लगभग सभी भाषाओं में इसका अनुवाद अनेक महापुरुषों ने अपने अनुसार किया। अवधि में गोस्वामी तुलसीदास जी मे रामचरितमानस की रचना कि जिसमे शबरी प्रसंग का वर्णन किया। 
माता शबरी का जन्म एक भील कुल में हुआ था, जिसे आदिवाशी समुदाय से जोड़ा जाता है। परंतु उनके अंदर धर्मकार्य, तथा ज्ञानार्जन कि रुचि थी। अतः उन्होंने विवाह नही किया और अपना घर को त्याग कर ऋषि मुनियों की सेवा तथा ज्ञान अर्जन के लिये वन में गए। परन्तु उनकी जाति के कारण अनेक ऋषियों और मुनियों ने उनको स्थान नही दिया, तब वो महाऋषि मतांगमुनि के आश्रम में गयी , उनकी भक्ति भाव तथा सेवा का भाव देखकर शबरी को सेवा का मौका दिया। शबरी ने पूरी निष्ठा तथा अनुशासन से गुरु कि सेवा की तथा आशिर्वाद एवं सिद्धि प्राप्त की।


जब मतांगमुनि अपने शिष्यों के साथ धरती छोड़ कर गए तो शबरी को उनकी भक्ति एवं निष्ठा को देखकर उन्हें आश्रम में रहने के लिये कहा , तथा बताया कि भगवान विष्णु जब श्रीराम के रूप में अवतार लेंगे तथा सीता की खोज में आएंगे, तो उन्हें सुग्रीव से मिलने का रास्ता बताए तथा उनसे भक्ति का ज्ञान प्राप्त करे। माता शबरी तभी से वहां पर श्रीराम के आने की राह देखती रही तथा नित्य उनके स्वागत की तैयारी करती रही।


माता शबरी से जुड़ी लोक कथा Folk talk related to Mata Shabri:


एक कथा के अनुसार माता शबरी एक भील कुल कि कन्या थी जिनके उनके अंदर भक्ति भाव तथा सभी जीवों के प्रति समान भाव प्रखर था। उनके कुल में सभी प्रयोजनों में जानवरों की बली प्रथा थी , परन्तु शबरी गलत समझती थी। अतः उनके विवाह में किसी जीव की हत्या न हो इएलिये उंन्होने घर को त्यागकर वन में ऋषयों और मुनियों की सेवा का राह चुना जहां पर उन्हें मतांगमुनि के साथ साथ कई महामुनियों की सेवा का मौका मिला। तथा अंत मे प्रभु श्रीराम के दर्शन पाकर उस परमपद को प्राप्त किया जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है।



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