भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

30 March, 2019

महाऋषि श्रृंगी की कथा। Story of Maharishi Shrringi.

महाऋषि श्रृंगी का परिचय:

महाऋषि श्रृंगी महान तापश्वि मुनि "विभांडक" के पुत्र एवं भगवान राम की बहन "शांता" के पति थे। शांता राजा दशरथ एवं कौशिल्या की पुत्री थी जिनको राजा दशरथ ने अपने मित्र अंगदेश के राजा "रोमपाद" को पुत्री के तौर पर दे दिया था। यह कथा रामायण में विस्तारीत है किंतु तुलसीदास कृत रामचरित मानस में नही है। ऋषि श्रृंगी की माता नही थी उनका जन्म विचित्र परिवेश में एक हिरण के गर्भ से हुआ था। जब राजा दशरथ को पुत्र न होने के कारण चिंता में थे तब उनके कुलगुरु वसिष्ठ ने पुत्र कामेष्टि यज्ञ करने को कहा और बोले यह यज्ञ केवल ऋषि श्रृंगी के द्वारा ही हो सकता है। ऋषि श्रृंगी को मनाने राजा दशरथ पैदल गए तथा उनपर प्रसन्न होकर महाऋषि श्रृंगी ने यज्ञ करवाया , जिसके उपरांत अग्निदेव खीर लेकर आये और श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और सत्रुहन का जन्म रघुकुल में हुआ।



महाऋषि श्रृंगी के जन्म की कथा:

पौराणिक कथायों के अनुसार महाऋषि विभांडक ने महान तप का अनुष्ठान किया था जिनके कारण इंद्र को भय हो गया कि कही ये अपने तप के बल से मेरा स्वर्गलोक न मांग ले। अतः इंद्र ने महाऋषि श्रृंगी के पिता महामुनि विभांडक का तप भंग करने का आयोजन किया।


महर्षि विभांडक प्रतिदिन एक शरोवर में स्नान करने जाते थे, एक दिन जब वो स्नान कर रहे थे तो इंद्र ने अपनी एक अप्सरा उर्वसी को वहां भेज दिए। उर्वसी वहां पर जाकर अति कामुक भाव प्रगट करने लगीं, उर्वसी की कामुक आचरण को देखकर ऋषि विभांडक अपने आप को नियंत्रित नही रख पाए और उनका वीर्य स्खलित हो गया। जिसके बाद उन्हें अपने आप पर बहुत क्रोध आया क्योंकि वो अपने ऊपर नियंत्रण नही रख पाए। फिर वो वहां से अपने आश्रम में चले गए।
उसी समय एक हिरनी वहां पर अपनी प्यास बुझाने आयी जो पानी के साथ ऋषि के वीर्य को पी गयी, और गर्भवती हो गयी। वास्तव में वो एक देवकन्या थी जिसे किसी कारण ब्रह्मा जी ने श्राप दिया था और वो हिरनी के स्वरूप में हो गयी थी, उसकी बहुत विनती और छमा मांगने पर ब्रह्मा जी ने कहा था कि जब वो एक ऋषि पुत्र को जन्म देगी तब अपने स्वरूप में वापस आजायेगी। अतः उस हिरण के गर्भ से ऋषि पुत्र का जन्म हुआ, जन्म के उपरांत वो उसे वन में ही छोड़कर चली गई, हिरनी के गर्भ से जन्म लेने के कारण श्रृंगी के मस्तक पर हिरण की सींग भी थी।

महर्षि श्रृंगी और श्रीराम की बहन शांता का विवाह:

एक बार अंगदेश में बहुत बड़ा अकाल पड़ा जिसके कारण भोजन की अत्यधिक कमी तथा बहुत समस्या उत्पन्न हो गयी। उसका कोई निवारण अंगदेश के राजा रोमपाद को नही मिल रहा था। तब पुरोहितों के सुझाव से यज्ञ करने को कहा गया, तथा वह यज्ञ महाऋषि श्रृंगी द्वारा करवाने का सुझाव था।
राजा 

No comments:

Post a Comment