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09 March, 2019

ध्रुव कि तारा बनने की कथा। Story of Dhruv to becoming Star in hindi.

ध्रुव के तारा बनने की कथा: 


ध्रुव कि कथा का वर्णन कई पुराणो में है उनकी श्रीमद्भागवत में वर्णित कथा के अनुसार, मनु और शतरुपा के पुत्र थे उत्तानपाद। उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो पत्नियां थीं। राजा उत्तानपाद को सुनीति से ध्रुव और सुरुचि से उत्तम नामक दो पुत्र उत्पन्न हुए। पहली पत्नी सुनीति के पुत्र न होने की वजह से राजा उत्तानपाद ने दूसरी शादी की थी जिनका नाम सुरुचि था। उत्तानपाद के दूसरे विवाह के पश्चात सुनीति को वन भेज दिया गया था क्योंकि यही उनकी दूसरी पत्नी सुनीति की शर्त थी।

चित्र साभार: riligiuskart

एक बार उत्तानपाद वन में शिकार पर गए और घायल हो गए, यह बात सुनीति को पता चली तो उसने उत्तानपाद को अपनी कुटिया पर ले गयी और उत्तानपाद की सेवा करके ठीक कर लिया, इन्ही कुछ दिनों तक साथ रहने के कारण सुनीति गर्भवती हो गयी और ध्रुव नामक पुत्र को जन्म दिया।
कुछ समय पश्चात उत्तानपाद ध्रुव को अपने महल में ले आये, और साथ मे रखने लगे। ध्रुव को उनकी माँ ने बताया था कि अगर उनको महल में प्यार न मिले तो भगवान की भक्ति करे जिनसे उनको प्यार मिलेगा।
एक दिन उत्तानपाद की गोद में खेलते देख उत्तानपाद की दूसरी पत्नी सुरुचि का पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। सौतन के पुत्र को अपने पति की गोद में वह बर्दाश्त न कर सकी। उसका मन ईष्र्या से जल उठा। उसने झपट कर बालक ध्रुव को राजा की गोद से खींच लिया और अपने पुत्र उत्तम को उसकी गोद में बिठा दिया तथा बालक ध्रुव से बोली, अरे मूर्ख! राजा की गोद में वही बालक बैठ सकता है जो मेरी कोख से उत्पन्न हुआ हो। सुरूचि ने कहा कि तू मेरी कोख से उत्पन्न नहीं हुआ है। इसलिए तुझे इनकी गोद में या राजसिंहासन पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है।
पांच वर्ष के ध्रुव को अपनी सौतेली मां के व्यवहार पर क्रोध आया, और वह भागते हुए अपनी मां सुनीति के पास आए तथा सारी बात बताई। सुनीति बोली, बेटा! तेरी सौतेली माता सुरुचि से अधिक प्रेम के कारण तुम्हारे पिता हम लोगों से दूर हो गए हैं। अतः तुम भगवान श्रीहरि की भक्ति करो वो तुम्हे अपनी गोद मे बैठा लेगे।
उसके बाद यमुना के तट पर ध्रुव में भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की और उसकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान भक्तवत्सल प्रगट हुए और वरदान मांगने को कहा। तब ध्रुव ने कहा कि मुझे अपने पिता से प्यार नही मिला है और मेरी माता कहती है कि आप संसार के पिता है तो आप मुझे अपनी गोद मे बिठा लीजिए। अतः भगवान विष्णु में उनको तारा बनने का आशीर्वाद दिया जिसके बाद उन्हें सप्तर्षियों से भी उच्च स्थान प्राप्त हुआ।



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