भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

19 March, 2019

अमरनाथ धाम से जुड़ी कथा। Story of Amarnath Dham.

अमरनाथ धाम Amarnath Dham

हिमालय में स्थित अमरनाथ धाम भगवान शिव का प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहां पर बने भगवान शिव के प्राकृतिक शिवलिंग का दर्शन एवं पूजन के लिए लाखों की संख्या में भक्तगण उस स्थान की यात्रा पर जाते है। कई पुराणों के साथ शिवमहापुराण में भी इसकी कथा का वर्णन किया गया है।माना जाता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का गूढ़ रहस्य इसी स्थान पर सुनाया था। उन्होंने इस स्थान का चयन इसीलिखे किया था क्योंकि उस स्थान पर कोई नही रहेगा , तथा उन्होंने अपने साथ रहने वाले गणों और वासुकी नाग एवं गंगा को भी पीछे छोड़कर गए थे।




अमरनाथ की कथा:

एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि प्रभु आप तो अजर अमर है किंतु मुझे बार बार जन्म लेना पड़ता है, और बड़ी घोर तपस्या के पश्चात आपकी प्राप्ति होती है अतः आप समक्ष अमरत्व का गूंध रहस्य का वर्णन करे। भगवान शिव ने तो पहले टालने की कोशिश की परंतु माता पार्वती के हट के कारण विवश हो गए और निर्जन स्थान की तलाश में अमरनाथ के स्थान को चुना।
क्योंकि वो माता पार्वती को एकांत में इस रहस्य का वर्णन करना चाहते थे अतः उन्होंने अपने साथ रहने वाले पंचमहाभूत गण जैसे नंदी, नाग, गणेश, चंद्र, और गंगा को त्याग दिया।
नंदी को पहलगाम में, वासुकी नाग को शेषनाग लेख नामक स्थान , गणेश , चंद्रमा तथा माता गंगा को भी अलग अलग स्थान में तयाग कर उस निर्जन गुफा में प्रवेश किये।
भगवान शिव ने माता को अमरत्व की कथा का वर्णन करना सुरु किया और वो कथा को सुनाने में लीन हो गए, माता पार्वती को नींद आ गयी। उसी स्थान पर कबूतरों का एक जोड़ा था जो यह कथा सुन रहा था, तथा माता पार्वती के सोजाने पर हूं हूं कि आवाज कर रहे थे। भगवान भोलेनाथ कथा कहने में इतने लीन हो गए कि उन्हें पता ही नही चला।
कथा की समाप्ति के पश्चात उंन्होने देखा कि पार्वती जी सोगयीं है और कबूतर कथा सुन रहे थे तो उन्हें क्रोध आया और वो उन्हें मारने गए , परंतु कबूतरों का वह जोड़ा भगवान की शरण मे आ गया। भगवान ने उन्हें छमा कर वही सदा के लिए रहने को कहा।

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