भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

27 February, 2019

मां गंगा के अवतरण की पौराधिक कथा। Pauranik story of ganga river.

मां गंगा कि पवित्रता और महिमा:

गंगा नदी भारत मे बहने वाली सबसे पवित्र नदी है, जिसे पुराणों में मोक्ष दायनी नदी कहा गया है। पौराधिक कथायों के अनुसार जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया था और असुरों के राजा बलि से तीन गज जमीन मांगी थी, उस समय उंन्होने अपने दूसरे गज में अपना पैर व्रह्मा लोग में ले गए वहां पर व्रह्मा देव ने उनका पैर धोये और उस पवित्र जल को अपने कमंडल में एकत्रित कर लिया। उसी पवित्र जल को माँ गंगा कहा गया। जिसको धरती पर इक्ष्वाकु वंश के रघु कुल में जन्मे राजा भगीरथ ने अपने पित्तरों को मोक्ष प्रदान करने के लिए तपस्या करने व्रह्मा लोक से धरती पर लाये। ये राजा भगीरथ भगवान राम के पूर्वज थे। भगीरथ के प्रयास से माँ गंगाजी का धरती पर अवतरण हुआ इसलिए गंगा जी को उनके नाम पर भागीरथी भी कहा जाता है।

माँ गंगा के धरती पर अवतरण की कथा:

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम के कुल जिसे रघुकुल या इक्षवाकु वंशज कहा जाता है साथ ही इन्हें सूर्यवंशी भी कहा जाता है। इनके कुल में एक परम प्रतापी राजा सगर हुए जिनका योगदान सागर को खुदवाने में किया था।
राजा सगर की दो रानियां थी परंतु उनको कोई पुत्र नही था अतः उन्होंने पुत्र की प्राप्ति के लिए तपस्या की जिसके फलस्वरूप उनकी पहली रानी को एक पुत्र तथा दूसरी रानी के गर्भ के एक तुम्बा निकला जिसे तोड़ने पर 60हजार पुत्र उत्पन्न हुए। राजा सगर के पहले पुत्र का नाम असमंजस था और उन्हीने वंश को आगे बढ़ाया।
राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया जिसमें नियम अनुसार घोड़ा छोड़ा जाता है। उस घोड़े को इंद्र देव ने चुराकर कपिलमुनि के आश्रम में बांध दिया। कपिलमुनि बहुत दिनों से तपस्या कर रहे थे अतः इंद्र को डर था कि तपस्या के बाद वो इंद्र का आसान न मांग ले। जब सगर पुत्र जिनकी संख्या 60 हजार थी घोड़ा ढूढ़ते हुए कपिलमुनि के आश्रम में गए और घोड़ा देखकर अपनी अल्पबुद्धि के अनुसार कपिलमुनि का बहुत अपमान किया। जिसके कारण कपिलमुनि ने क्रोध में आंखे खोली और सभी को भस्म कर दिया। फिर बाद में उन्होंने यह उपाय बताया कि जब माँ गंगा का पवित्र जल इस स्थान पर आएगा तभी इनको मोक्ष प्राप्त होगा।
तब से सभी मे मां गंगा को धरती पर लाने की कोशिश की परंतु सफल नही हुए, तब उन्ही के कुल में राजा दिलीप के पुत्र भगीरथ ने संकल्प लिया जिसके बाद उन्होंने व्रह्मा देव की बहुत बड़ी घनघोर तपश्या की। जिसके फलस्वरूप वृह्मदेव प्रसन्न हुए और वर मांगने को कहा, तब भगीरथ ने मां गंगा को धरती पर लाने का वर मांगा। वृह्मदेव मान गए परंतु उंन्होने कहा कि जब गंगाजी धरती पर अत्यंत वेग से आएगी तो उनका वेग धरती सहन नही कर पायेगी, अतः तुम शिवजी से इसका उपाय मांगों। उसके बाद भगीरथ ने भगवान शिव की कठिन तपस्या की और उनको प्रसन्न कर लिया।
उसके बाद भगवान व्रह्मा ने अपने कमंडल से गंगाजी को धरती पर जाने की आज्ञा दी जिसजे वो अत्यंत वेग से धरती की तरफ आयी जिसे बीच मे भगवान भोलेनाथ ने अपनी जटाओं में समेट लिया और एक धार धरती पर छोड़ दी, जिसके बाद मां गंगा भारत की घरती पर अविरल बहने लगी। जिशसे सगर पुत्रों को मोक्ष प्रदान हुआ।
मां गंगा भारत मे जिस जिस स्थान से होकर बहती है शुख, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करती है।

गंगा जी के मुख्य स्थल:

गंगा नदी का उद्गम भारत के उत्तराखंड से गंगोत्री नामक स्थान से होता है। जिसके बाद वो भारत के प्रमुख स्थानों जैसे हरिद्वार, काशी, प्रयागराज होकर गंगासागर नामक स्थान में सागर में विलय हो जाती है।
हरिद्वार की महिमा भगवान विष्णु के चार धाम में है, काशी भगवान शिव की नगरी है तथा प्रयागराज में तीन पवित्र नदियों गंगा , यमुना और शरस्वती का संगम है। अतः यह तीनों स्थान हिन्दू परंपरा से बहुत महत्वपूर्ण है। प्रयागराज तथा हरिद्वार में गंगा तट पर कुम्भ का आयोजन होता जिसमे स्नान से समस्त पापों का नाश एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है




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