google.com, pub-8785851238242117, DIRECT, f08c47fec0942fa0 भगवान विष्णु के सातवे अवतार: गौतम बुद्ध। Gautam Buddha avatar of lord Vishnu. - पौराणिक दुर्लभ कथाएं

भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

18 February, 2019

भगवान विष्णु के सातवे अवतार: गौतम बुद्ध। Gautam Buddha avatar of lord Vishnu.

गौतम बुद्ध:

भगवान बुद्ध संसार को ज्ञान का मार्ग प्रदान किया और उनकी शिक्षाओं से बौद्ध धर्म की स्थापना और प्रचलन हुआ। गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु के दशावतारों के से नौवा अवतार कहा गया है। कई पौराधिक और हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में इसका वर्णन है। भगवान बुद्ध ने लोगो को अहिंसा के मार्ग में चलने का उपदेश दिया। उनके उपदेश में लोगो को दुःख और उसके कारण और निवारण के लिए अष्ठांगिक मार्ग सुझाया था। तथा उन्होंने लोगो को मध्यम मार्ग का उपदेश दिया था।
भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईशा पूर्व लुम्बनी, नेपाल में इक्षवाकु क्षत्रिय कुल में हुआ था। उनका नाम सिद्धार्थ रखा गया था। उनके पिता सुद्धोधन और माता महामाया था। माता की मृत्यु के उपरांत महामाया की बहन ने किया था। उनकी पत्नी का नाम यशोधरा था तथा उनका एक पुत्र था जिनका नाम राहुल था। उनके गुरु विश्वामित्र थे।
एक रात अचानक उन्होंने अपना परिवार और राजपाठ छोड़कर वन की तरफ दिव्य ज्ञान की खोज में चले गए। और कठिन परिश्रम और साधना से उनके बाद उन्हें बोधी वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हो गयी , वह स्थान विहार के बोध गया के नाम से विख्यात है। तब उनका नाम सिद्धार्थ से बुद्ध हो गया , गौतम गोत्र के कारण उनको गौतम बुद्ध कहा गया।

विरक्ति का कारण:

भगवान बुद्ध जिनका नाम सिद्धार्थ था, उनका राज्य बहुत सम्पन्न और सभी तरह से खुशहाल था। उनके आनंद और विलाश का सारा प्रबंध उनके पिता और राजा सुद्धोधन ने किया था। परंतु उनको धन, वैभव और विलासिता रोक नही पाई। 
एक दिन जब वे सैर पर निकले तो उनको एक बूढ़ा आदमी मिला जिसकी अवस्था बहुत जर्जर थी। दूसरे दिन उनको उन्हें एक बहुत बूढा और रोगी व्यक्ति मिला जो बहुत से रोगों से ग्रसित था और बहुत दुखी था। तीसरे दिन दिन जब वे सैर पर निकले तो उन्हें एक मृतक को चार लोग ले जाते हुए दिखे साथ मे बहुत लोग थे जिनमें से कुछ लोग रो रहे थे।
तब उनके अंदर विरक्ति का भाव हुआ उनको लगा कि जवानी, और सरीर नाशवान है, फिर जब वे चौथे दिन सैर पर निकले तो उनके एक वैरागी व्यक्ति दिखा जो संसार से विरक्त था। तब वे भी संसारिक भावनाओं और इक्षाओ से मुक्त हो सन्यास के मार्ग में चल दिये।

भगवान बुद्ध के ज्ञान की प्राप्ति:

भगवान बुद्ध को बिहार के बोध गया में बोधि वृक्ष के नीचे हुआ, जिसका उपदेश उन्होंने अपने चार शिष्यों को दिया। उन्होंने शांति हेतु मध्यम मार्ग का उपदेश दिया जिसमें उन्होंने वीणा के तारों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर वीणा के तारो को ढीला रखा जाए तो स्वर नही निकलते और अगर अधिक कड़े कर दिए जाय तो टूट जाते है अतः मध्यम मार्ग ही सबसे उत्तम है। उन्होंने ध्यान, चार आर्य सत्य, और साष्टांग मार्ग आदि का उपदेश दिया।

बुद्ध का निधन परिनिर्वाण:

भगवान बुद्ध का निधन या परिनिर्वाण 483 ईशा पूर्व भारत के कुशीनगर में हुआ तब उनकी आयु 80 वर्ष जे आसपास थी। उनके शिष्यों के संख्या भी बहुत बड़ी,जिसके कारण बौद्ध धर्म का प्रचार हुआ। कई राजा महाराजा भी बौद्ध धर्म से जुड़े और प्रचार किया जिसमें सम्राट अशोक का भी बहुत बड़ा योगदान था।



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