भारत एक बहुत आध्यात्मिक देश है। यंहा हिन्दू सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता है। यह वेदों ,पुराणों, प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों का देश है। भारत के मंदिरों और देवी देवताओं की प्राचीन एवम दुर्लभ कथाये है जिसे यंहा प्रस्तुत किया गया है। आध्यात्मिक कथाये, दुर्लभ कथाये, मंदिरो की कथाये, ज्योतिर्लिंग की कथाये।

02 January, 2019

त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग कि कथा । Rare Story Of trimbakeshwar jyotirlinga.

त्रियंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग:

महाराष्ट्र के नाशिक जिले में पवित्र गोदावरी नदी के उद्गम स्थल में स्थित त्रियंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर और इसकी शिल्प कला बहुत प्राचीन है। गौतम ऋषि की तपश्या से भगवान शिव का आगमन हुआ और माँ गंगा का गोदावरी रूप में प्रागट्य हुआ।

त्रियंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा:

महाशिव पुराण के अनुसार एक बार बहुत बड़ा अकाल पड़ा था तब गौतम ऋषि ने अपने तप के वेग से एक ऐसे कुंड का निर्माण किया जिसका जल कभी नही सूखता था और जिसके कारण चारो तरफ बनी रहती थी।
हर जगह सूखा था परंतु उस स्थान में जल था जिससे सभी जानवर और इंसान वंहा जल पीते थे, कुछ ऋषि भी उस स्थान में रहने लगे। परंतु कुछ दिन बाद ही वो गौतम ऋषि के मान और कीर्ति से जलने लगे और उनको वंहा से भगाने का उपाय करने लगे।
फिर उनलोगों ने गणेश जी की तपश्या करके प्रसन्न कर लिया और गणेश जी आगमन पर उनसे ऋषि गौतम से छल करके उनको वंहा से भगाने का प्रबंध करने को कहने लगे।
भगवान गणेश के समझाने पर भी वो न समझे तब गणेंश जी ने उनकी बात मान ली और कहा कि इससे ऋषि गौतम की कीर्ति और बढ़ जायेगी।
तब उन्होंने माया की गाय बनकर गौतम ऋषि के खेत ने चरने लगे और बाकी लोग वंहा आसपास छुप गए।
जब गौतम ऋषि उस गाय को भगाने के लिए पत्थर मारा तो गाय मर गयी। उसी समय सारे लोग इकट्ठा हो कर गौतम ऋषि पे गौ हत्या का दोष लगा दिया, और कहा कि वो उस स्थान को त्याग दे और अपना पाप से मुक्त होने के लिए गंगा नदी के आवरण करवाये तभी गौ हत्या का दोष मुक्त होगा।
फिर ऋषि गौतम और उनकी पत्नी अहिल्या ने कई वर्षों तक करोड़ो पार्थिव शिवलिंग बना कर भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया। भगवान शिव पार्वती के साथ वंहा प्रगट हुए। और गौतम को उनपर हुए छल कि कथा भी बताई।
तब गौतम ने उनसे म गंगा के अवतरण होने वरदान मांगा, तव वंहा शिव जी के आदेश पर गंगा प्रगट हुई और कहा कि प्रभु मैं यंहा अकेले नही रहूंगी ।
तब गंगा जी के निवेदन पर भगवान शिव वंहा त्रियंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप ने स्थापित हुए।

सारांश Conclusion:

विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान पे आस्था नही छोड़नी चाहिए, और कुछ गलत होने पर भी कुछ सही होने का संकेत होता है।


तो दोस्तो आपको ये कथा कैसी लगी अपने सुझाव दे। और शेयर करे।


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