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23 December, 2018

लक्ष्मण जी कि दुर्लभ कथा। Rare Story of Lord Laksman.

लक्ष्मण जी कि दुर्लभ कथा




एक बार की बात है जब अगस्त्य मुनि अयोध्या आये और प्रभु राम से बात कर रहे थे चौदह वर्ष के वनवास के बारे में। तब अगस्त्य मुनि ने कहा लक्ष्मण जी की भक्ति अद्भुत थी, लक्ष्मणजी की कके बिना श्री रामकथा पूर्ण नहीं है ।


अगस्त्य मुनि बोले
श्रीराम,  सबसे बड़ा वीर तो मेघनाध ही था, उसने अंतरिक्ष में स्थित होकर इंद्र से युद्ध किया था और बांधकर लंका ले आया था, ब्रह्मा ने इंद्रजीत से दान के रूप में इंद्र को मांगा तब इंद्र मुक्त हुए थे, और लक्ष्मण ने उसका वध किया इसलिए वे सबसे बड़े योद्धा हुए।

श्रीराम को आश्चर्य हुआ लेकिन भाई की वीरता की प्रशंसा से वह खुश थे।

अगस्त्य मुनि ने कहा
प्रभु, इंद्रजीत को वरदान था कि उसका वध वही कर सकता था कि जो चौदह वर्षों तक न सोया हो, जिसने चौदह साल तक किसी स्त्री का मुख न देखा
हो और चौदह साल तक भोजन न किया हो।

श्रीराम बोले
परंतु मैं बनवास में चौदह वर्षों तक लक्ष्मण के हिस्से का फल-फूल देता रहा, मैं सीता के साथ एक कुटी में रहता था, बगल की कुटी में लक्ष्मण थे, फिर सीता का मुख भी न देखा हो, और चौदह वर्षों तक सोए न हों, ऐसा कैसे संभव है।

अगस्त्य मुनि सारी बात मुस्कुराकर समझ गए प्रभु से कुछ छुपा है भला दरअसल, सभी लोग सिर्फ श्रीराम का गुणगान करते थे लेकिन प्रभु चाहते थे कि लक्ष्मण के तप और वीरता की चर्चा भी अयोध्या के घर-घर में हो।

अगस्त्य मुनि ने कहा ठीक है क्यों न हम लक्ष्मणजी से पूछ ले?

लक्ष्मणजी आए,

प्रभु ने पूछा

हम तीनों चौदह वर्षों तक साथ रहे फिर तुमने सीता का मुख कैसे नहीं देखा ?

फल दिए गए फिर भी अनाहारी कैसे रहे ? और 14 साल तक सोए नहीं ? यह कैसे हुआ ?

लक्ष्मणजी ने बताया

भैया, जब सुग्रीव ने हमें उनके आभूषण दिखाकर पहचानने को कहा, आपको स्मरण होगा मैं तो सिवाए उनके पैरों के नुपूर के कोई आभूषण नहीं पहचान पाया था क्योंकि मैंने कभी भी उनके चरणों के ऊपर देखा ही नहीं.

चौदह वर्ष नहीं सोने के बारे में सुनिए - आप औऱ माता एक कुटिया में सोते थे, मैं रातभर बाहर धनुष पर बाण चढ़ाए पहरेदारी में खड़ा रहता था, निद्रा ने मेरी आंखों पर कब्जा करने की कोशिश की तो मैंने निद्रा को अपने बाणों से बेध दिया था। निद्रा ने हारकर स्वीकार किया कि वह चौदह साल तक मुझे स्पर्श नहीं करेगी लेकिन जब श्रीराम का अयोध्या में राज्याभिषेक हो रहा होगा और मैं उनके पीछे सेवक की तरह छत्र लिए खड़ा रहूंगा तब वह मुझे घेरेगी ॥

अब मैं 14 साल तक अनाहारी कैसे रहा? मैं जो फल-फूल लाता था आप उसके तीन भाग करते थे एक भाग देकर आप मुझसे कहते थे लक्ष्मण फल रख लो, आपने कभी फल खाने को नहीं कहा- फिर बिना आपकी आज्ञा के मैं उसे खाता कैसे? मैंने उन्हें संभाल कर रख दिया। सभी फल उसी कुटिया में अभी भी रखे होंगे।




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